इंदौर: लसूडिय़ा थाना क्षेत्र में बुजुर्ग महिला डॉक्टर की जमीन को फर्जी दस्तावेजों के जरिए गिरवी रखकर अलग-अलग बैंकों से करीब एक करोड़ 73 लाख रुपये का ऋण लेने के मामले में पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. दो मुख्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी पर पुलिस ने इनाम घोषित किया है.
पुलिस के मुताबिक वार्ड क्रमांक-8, बालाघाट रोड निवासी 71 वर्षीय डॉक्टर राजरानी खरे को वर्ष 1994 में चिकित्सक नगर कॉलोनी में 2000 वर्गफीट का भूखंड आबंटित हुआ था.
भूखंड पर 500 वर्गफीट निर्माण और शेष हिस्से पर बाउंड्रीवाल बनी हुई है. 21 जनवरी 2025 को एसएमएफजी इंडिया क्रेडिट फाइनेंस बैंक द्वारा भूखंड व भवन पर कब्जा लेने संबंधी नोटिस चस्पा किए जाने के बाद पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ. जांच में सामने आया कि आरोपियों ने डॉक्टर का प्रतिरूपण कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और एक ही भूखंड की दो अलग-अलग रजिस्ट्री कराकर दो बैंकों से लोन ले लिया.
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि एक रजिस्ट्री के आधार पर जना स्मॉल फाइनेंस बैंक से 80 लाख रुपये और दूसरी रजिस्ट्री के आधार पर एसएमएफजी इंडिया क्रेडिट फाइनेंस बैंक से 93 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया गया. रजिस्ट्री में दर्शाए गए बैंक ट्रांजेक्शन आपसी खातों में दिखावटी रूप से किए गए थे. मामले में डॉक्टर का प्रतिरूपण कर फर्जी महिला बनी उषा बड़ोनिया, उसकी सहयोगी फरहत कौसर उर्फ रूबिना, फर्जी फर्म के नाम से खाता खोलने वाले मुन्नवर हुसैन, और वीरेंद्र सिंह कुमरे, आधार और सिम के जरिए पहचान बदलने में मदद करने वाले अजय वर्मा और फर्जी विक्रय पत्रों पर हस्ताक्षर करने वाले अब्दुल रज्जाक को गिरफ्तार कर लिया गया है. सभी छह आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया.
पुलिस ने बताया कि मामले का मुख्य षड्यंत्रकर्ता जावेद अहमद कुरैशी और दूसरी फर्जी महिला बनकर रजिस्ट्री कराने वाली तनवीर उर्फ तन्नु अभी फरार हैं. दोनों की गिरफ्तारी पर डीसीपी जोन-2 की ओर से 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है. मामले में बैंक कर्मचारियों, दस्तावेज सत्यापन करने वाले अधिवक्ताओं और आधार कार्ड सेंटर ऑपरेटरों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिनकी जांच जारी है.
इस तरह दिया फर्जीवाड़े को अंजाम
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह ने पहले डॉक्टर की पहचान का दुरुपयोग कर फर्जी आधार कार्ड बनाया, सिम ली और बैंक खाते खुलवाए. इसके बाद एक ही भूखंड की दो रजिस्ट्री कराई गईं और कागजों में लाखों रुपये के ट्रांजेक्शन दिखाकर दस्तावेज वैध बनाए गए. इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग बैंकों से भारी-भरकम लोन लिया गया. किस्तें नहीं भरने पर जब बैंक ने कब्जे की कार्रवाई शुरू की, तब असली मालिक को फर्जीवाड़े की जानकारी मिली. पुलिस अब पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है. साथ ही दोनों फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश कर रही है.
