
पुलिस और जनता के बीच सेतु बनी संस्थाएं
भोपाल, 17 जनवरी. मध्यप्रदेश पुलिस अपने समाजिक सुरक्षा मॉडल को लगातार विकसित कर रही है, जिसमें सामुदायिक पुलिसिंग की कार्यप्रणाली को मजबूत किया गया है. यह मॉडल समाज और पुलिस के बीच विश्वास और सहयोग की भावना को बढ़ाता है, और एक सुरक्षित, संगठित और शांतिपूर्ण समाज की ओर मार्ग प्रशस्त करता है. इसमें प्रमुख भूमिका निभाने वाली संस्थाएं हैं, जो पुलिस के साथ मिलकर समाज के जमीनी स्तर पर बदलाव और अपराधों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. इन संस्थाओं के लिए शुक्रवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला के प्रारंभ में पुलिस उप महानिरीक्षक सामुदायिक पुलिसिंग विनीत कपूर ने कहा कि यह कार्यशाला सामुदायिक पुलिसिंग और समाज के बीच विश्वास और सहयोग को बढ़ाने पर केंद्रित है. इसमें सामाजिक संस्थाएं, जैसे गैर-सरकारी संगठन, शैक्षणिक संस्थाएं और स्थानीय नागरिक समूह, महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. ये संस्थाएं जन जागरूकता अभियान चलाकर अपराध और सामाजिक बुराइयों के प्रति जनता को सचेत करती हैं, समुदाय की जरूरतों और समस्याओं को पहचानने में पुलिस का सहयोग करती हैं, और पुलिस व नागरिकों के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए संवाद और सहयोग को प्रोत्साहित करती हैं. संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण पुलिस उप महानिरीक्षक पीटीआरआई टीके विद्यार्थी ने कहा कि पुलिस के मैदानी कार्य में महिला एवं बाल अपराधों की रोकथाम के लिए सामाजिक संगठनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. ये संगठन जागरूकता फैलाने, अपराध की रोकथाम और पीडि़तों को सहायता प्रदान करने में पुलिस का प्रभावी सहयोग करते हैं. सामाजिक संगठन न केवल महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाते हैं, बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस के साथ मिलकर काम भी करते हैं. संस्थाओं ने दिया प्रजेंटेशन कार्यशाला में भाग लेने वाले विभिन्न सामाजिक सहयोगी संगठनों जिसमें समर्थ संस्था, प्रदीपन, कृषक सहयोग संस्थान, उदय संस्था, आधार संस्था, साथिया वेलफेयर सोसाइटी, आईजेएम, आवाज, सम्मान समिति संस्था, युवा विकास मंडल, पहल संस्था, बचपन संस्था, कदम जन विकास समिति, सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट, अहिंसा वेलफेयर सोसाइटी, मुस्कान संस्था, बचपन बचाओ संस्था, बाईपास संस्था, आरंभ संस्था, उड़ान संस्था, संगिनी संस्था एवं जन साहस ने अपना प्रेजेंटेशन दिया.
