
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट में प्रदेश के शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में असिस्टेंट, एसोसिएट प्रोफेसर व अन्य पदों पर महिलाओं को सौ प्रतिशत आरक्षण दिये जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया के लिए संशोधित विज्ञापन जारी किया है। पुरुष उम्मीदवार 13 जनवरी तक आवेदन कर सकते हैं। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिका का निराकरण कर दिया।
जबलपुर निवासी नौशाद अली की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की ग्रुप-1 सब ग्रुप-2 संयुक्त भर्ती परीक्षा 2025 के विज्ञापन में असिस्टेंट प्रोफेसर तथा एसोसिएट प्रोफेसर सहित ट्यूटर के कुल 286 पदों पर महिला उम्मीदवारों को सौ प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर और 218 सिस्टर ट्यूटर के पद भरे जाने हैं। इनमें पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर कर दिया गया है।
याचिका में कहा गया था कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा के तहत महिलाओं को अधिकतम 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सकता है। सरकार के विभागीय नियम तथा इंडियन नेशनल काउंसिल के मापदंड लिंग के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देते हैं। लोक स्वास्थ्य कल्याण विभाग के द्वारा की जा रही भर्ती में संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 तथा भर्ती के नियमों की अवहेलना है। सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले के 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का उल्लंघन भी है। संविधान के अनुच्छेद 16 2 के तहत केवल लिंग के आधार पर किसी नागरिक को सरकारी रोजगार से वंचित करना भेदभाव है। सरकार की तरफ से बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान संशोधित विज्ञापन जारी किये जानकारी प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि पुरुष उम्मीदवारों के लिए आवेदन दायर करने के अंतिम तिथि 13 जनवरी निर्धारित की गयी है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता विशाल बघेल ने पैरवी की।
