नई दिल्ली | 07 जनवरी, 2026: भारत ने रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक ऐतिहासिक कदम बढ़ा दिया है। डीआरडीओ (DRDO) के प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने बेंगलुरु में आयोजित ‘तेजस-25’ नेशनल सेमिनार में बड़ी घोषणा की है कि देश का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट ‘एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट’ (AMCA) प्रोजेक्ट अब वास्तविक विकास के चरण में पहुंच चुका है। डॉ. कामत के अनुसार, इस अत्याधुनिक युद्धक विमान का पहला प्रोटोटाइप 2028 के अंत तक बनकर तैयार हो जाएगा और इसकी पहली सफल उड़ान 2029 की शुरुआत में होने की प्रबल संभावना है। यह प्रोजेक्ट अब केवल डिजाइन और कॉन्सेप्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय वायुसेना की जरूरतों के अनुसार समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है।
इस फाइटर जेट के विकसित होने के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा हो जाएगा, जिनके पास अपनी पांचवीं पीढ़ी की हवाई शक्ति है। वर्तमान में केवल अमेरिका (F-35), रूस (Su-57) और चीन ही इस श्रेणी में अग्रणी माने जाते हैं। एएमसीए (AMCA) की सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘स्टील्थ’ तकनीक होगी, जो इसे दुश्मन के रडार की नजरों से ओझल रखने में सक्षम बनाएगी। वेनेजुएला जैसी वैश्विक घटनाओं और बढ़ती सुरक्षा संवेदनशीलता को देखते हुए भारत के लिए यह प्रोजेक्ट रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि एएमसीए भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा और विदेशी निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर देगा।
डीआरडीओ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि एएमसीए कार्यक्रम की सफलता का बड़ा श्रेय ‘तेजस’ परियोजना से मिले अनुभवों को जाता है। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद, तेजस के कारण भारत में आज एक मजबूत डिफेंस इकोसिस्टम, कुशल इंजीनियरों की टीम और आधुनिक फ्लाइट टेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो चुका है। मिशन 2047 के तहत भारत को एक सैन्य महाशक्ति बनाने के विजन में एएमसीए एक मील का पत्थर साबित होगा। एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) और डीआरडीओ मिलकर इस मिशन को सफल बनाने में जुटे हैं, जिससे भविष्य के युद्धों में भारतीय आसमां की सुरक्षा अभेद्य हो सकेगी।

