ईडी ने साहिती इन्फ्राटेक धन शोधन मामले में पूरक आरोप पत्र दायर किया

नयी दिल्ली, 06 जनवरी (वार्ता) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ‘साहिती इन्फ्राटेक वेंचर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ ( एसआवीआईपीएल) के पूर्व अधिकारियों बी. लक्ष्मीनारायण और संधू पूर्णचंद्र राव के खिलाफ हैदराबाद की एक विशेष पीएमएलए अदालत में पूरक आरोप पत्र दायर किया है। ईडी ने मंगलवार को यह जानकारी दी ।

अदालत ने सोमवार को इस आरोप पत्र पर संज्ञान लिया। ईडी ने तेलंगाना पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर धन शोधन की जांच शुरू की थी।एसआवीआईपीएल , बी. लक्ष्मीनारायण और अन्य पर आरोप है कि उन्होंने एक विश्व स्तरीय आवासीय परिसर बनाने का ‘प्री-लॉन्च ऑफर’ जारी कर संभावित खरीदारों से बड़ी रकम वसूल की थी।

कंपनी खरीदारों को फ्लैट देने या उनके पैसे वापस करने में विफल रही, जिससे खरीदारों की मेहनत की कमाई डूब गयी। इसके बाद, एसआवीआईपीएल और अन्य समूहों द्वारा शुरू की गई विभिन्न परियोजनाओं के निवेशकों की शिकायतों पर कई अन्य प्राथमिकी दर्ज की गईं। फ्लैट या विला का वादा किए गये 700 से अधिक खरीदारों से लगभग 360 करोड़ रुपये की कुल राशि ठगी गई।

ईडी की जांच में पता चला कि एसआवीआईपीएल के पास रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) या हैदराबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एचएमडीए) की अनुमतियां नहीं थीं। इसके अलावा, परियोजना के लिए कोई एस्क्रो खाता नहीं था और निवेशकों से प्राप्त धन को विभिन्न बैंक खातों में जमा किया गया तथा नकद में भी वसूला गया था।

आरोपियों ने एसआईवीआईपीएल की अवैध रूप से शुरू की गई परियोजनाओं में ‘इन्वेंट्री’ (परिसंपत्ति) बेचकर 800 करोड़ रुपये से अधिक एकत्र किए। उन्होंने आवश्यक अनुमति और मंजूरी प्राप्त किए बिना इन्वेंट्री बेचकर जनता को धोखा दिया।

एसआईवीआईपीएल ने खरीदारों से भारी मात्रा में नकदी एकत्र की, जिसे फंड छिपाने और हेराफेरी करने के इरादे से बही-खातों में दर्ज नहीं किया गया था। ‘सरवानी एलीट’ परियोजना के लिए खरीदारों से 216.91 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी एकत्र की गई थी।

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि अपराध की कमाई को एसआईवीआईपीएल से संबंधित और अन्य संस्थाओं तथा व्यक्तियों को बिना किसी वास्तविक व्यावसायिक उद्देश्य के फर्जी बैंकिंग लेनदेन के जरिए भेजकर ठिकाने लगाया गया। इसके अलावा, अपराध की कमाई का एक बड़ा हिस्सा नकद के रूप में एसआईवीआईपीएल के बैंक खातों से निकाल कर हड़प लिया गया। बी. लक्ष्मीनारायण और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा अपराध की कमाई को विदेशी बैंक खातों में भी भेजा गया था।

जांच में यह भी पाया गया कि संधू पूर्णचंद्र राव एसआईवीआईपीएल के लगभग 126 करोड़ रुपये के गबन में शामिल थे, जिसमें नकद में वसूले गए 50 करोड़ रुपये से अधिक शामिल थे। फॉरेंसिक ऑडिट के बाद जब बी. लक्ष्मीनारायण को इसका पता चला, तो उन्होंने फंड की हेराफेरी के लिए संधू पूर्णचंद्र राव के खिलाफ तीन प्राथमिकी दर्ज कराईं।

इन प्राथमिकियों को वापस लेने के लिए, संधू पूर्णचंद्र राव ने बी. लक्ष्मीनारायण के साथ एक समझौता किया और 21 अचल संपत्तियां साहिती ग्रुप के कर्मचारियों और अन्य के नाम पर ट्रांसफर कर दीं, जिनका वास्तविक मालिकाना हक बी. लक्ष्मीनारायण के पास था। संधू पूर्णचंद्र राव ने भी अपराध की कमाई का उपयोग करके अपने परिवार के सदस्यों और संस्थाओं के नाम पर अचल संपत्तियां खरीदीं।

मामले की आगे की जांच जारी है।

 

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