इंदौर: शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौतों और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने के मामले को हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। इस संबंध में दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की नियमित डिवीजन बेंच में हुई। कोर्ट के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि क्षेत्र में दूषित पानी के कारण अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है और सैकड़ों लोग बीमार हुए हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि इससे पहले 2 जनवरी को हुई सुनवाई में राज्य सरकार ने स्टेटस रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें चार लोगों की मौत होना बताया गया था, जबकि वास्तविक आंकड़ा उस समय भी इससे अधिक था।
इसके बाद मौतों की संख्या और बढ़ने की जानकारी कोर्ट को दी गई। जनहित याचिकाएं एडवोकेट रितेश इनानी एवं पूर्व पार्षद महेश गर्ग और प्रमोद द्विवेदी द्वारा, एडवोकेट मनीष यादव के माध्यम से दायर की गई हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट से मांग की गई कि मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के साथ पीड़ितों को राहत दी जाए। हाई कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए मुख्य सचिव को तलब कर शासन से विस्तृत जवाब और स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
