
रीवा। लोक निर्माण विभाग द्वारा कराए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता परखने सोमवार को दो सदस्यीय टीम भोपाल से रीवा पहुंची. पीडब्ल्यूडी के उपयंत्रियों ने जांच टीम का सहयोग न कर एक दिन का सामूहिक अवकाश रखते हुए कार्यों की जांच का विरोध कर ज्ञापन भी सौंपा है. हालांकि जिन कार्यों के जांच का जिम्मा टीम को दिया गया था, उसे बगैर किसी स्थानीय अधिकारी के ही पूरा कर टीम वापस लौट गई है.
लोक निर्माण विभाग द्वारा कराए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता परखने के लिए हर माह भोपाल से दो सदस्यीय टीम दो बार आती है, जो कार्यों का भौतिक परीक्षण करने के बाद कमियों को शासन स्तर पर रखती है. जांच दल द्वारा दिए गए रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाती है. सोमवार को भोपाल से मुख्य अभियंता बीके आरख एवं गोपाल सिंह पहुंचे थे, जिनका राजनिवास में पीडब्ल्यूडी के उपयंत्रियों ने जांच में सहयोग न कर शासन की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते हुए ज्ञापन सौंपा है.
दो सदस्यीय टीम पहुंची जांच करने
भोपाल से रीवा पहुंची दो सदस्यीय जांच टीम को लोनिवि ब्रिज द्वारा निर्मित बेलन नदी एवं नैना नदी में बनाए गए पुलों के गुणवत्ता की जांच करनी थी. वहीं पीडब्ल्यूडी शहर संभाग द्वारा रतहरा से चोरहटा तक बनाई गई सडक़ एवं एमपीआरडीसी द्वारा बनाई गई देवतालाब से गढ़ एवं पीआईयू द्वारा हनुमना तहसील के किए गए निर्माण कार्यों की जांच की जानी थी.
अभियंता संघर्ष मोर्चा ने दिया ज्ञापन
मप्र संयुक्त अभियंता संघर्ष मोर्चा ने दो सदस्यीय टीम को जो ज्ञापन सौंपा है उसमें बताया है कि विभाग में उपयंत्रियों के लिए 1635 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 550 पद रिक्त हैं तथा 250 उपयंत्री अनुविभागीय अधिकारी के प्रभार में हैं. जबकि 50 उपयंत्री अन्य विभागों में प्रतिनियुक्ति पर हैं. इस प्रकार 1635 पद के विरुद्ध मात्र 785 उपयंत्री कार्यरत हैं. पूर्व की अपेक्षा वर्तमान में निर्माण कार्यों की मात्रा में चार गुना वृद्धि भी हुई है. ऐसे में एक यंत्री के पास एक जिले के अलावा अन्य जिलों का भी प्रभार होता है.
औचक निरीक्षण बंद की मांग
डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन द्वारा शासन के समक्ष यह मांग रखी गई है कि औचक निरीक्षण तत्काल बंद किया जाए. यदि आवश्यकता ही हो तो गुणवत्ताविहीन कार्य के लिए ठेकेदार को जिम्मेदार माना जाए तथा अभियंताओं को सुधार कार्य कराने के लिए समय दिया जाए. किसी निर्माण कार्य में कमी पाए जाने पर उपयंत्री से लेकर मुख्य अभियंता तक सभी को समान रूप से जिम्मेदार माना जाए तथा मैदानी अभियंताओं के विरुद्ध की गई कार्रवाई को वापस लिया जाए.
