जबलपुर: शहर के लोगों को पीने का शुद्ध पानी मिल रहा है इसकी कोई गारंटी नहीं है क्योंकि जमीनी स्तर पर जो तस्वीरें व हालात सामने नजर आ रहे हैं वो हैरान कर देने वाली हैं। ऐसे में शहरवासियों को इंदौर की भागीरथपुरा की घटना याद करते हुए डर सताने लगा है। भले ही नगर निगम प्रशासन द्वारा दावा किया जा रहा हो कि लैब में टेस्टिंग के बाद शहर में हर जगह शुद्ध पानी ही पहुंच रहा है लेकिन पेयजल वितरण व्यवस्था इन दावों पर प्रश्र चिह्न लगाते भी दिख रही है। जानकारी के अनुसार शहर के करीब 80 प्रतिशत पेयजल पाइपलाइन नाला-नालियों के बीच से होकर गुजरी है।
वहीं शहर में स्वच्छ जल आपूर्ति के नाम पर नगर निगम सालाना करीब 12 करोड़ रुपये पाइपलाइनों के रखरखाव और मरम्मत पर खर्च कर रहा है। इसके बावजूद, शहर की जल वितरण व्यवस्था आज भी गंदी नालियों के जाल से मुक्त नहीं हो पाई है। बस विडंबना यह है कि अधिकांश पाइपलाइनें 50 वर्ष से अधिक पुरानी हो चुकी हैं, जिन्हें अब तक नहीं बदला गया है। विदित हो कि कुछ दिनों पहले इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 16 लोगोंं की मौतें हुईं थीं जिसके बाद मध्यप्रदेश के सभी नगरीय निकायों में पेयजल वितरण व्यवस्था कटघरे में खड़ी हो गई थी।
संक्रामक बीमारियों की जद में आने लगे लोग
ऐसे में क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों के कारण नालियों का दूषित पानी रिसाव के जरिए घरों तक पहुंच रहा है और लोग ये पानी पीने से पेट दर्द और अन्य संक्रमण जैसी बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं। इन दिनों यह स्थिति शहर की घनी बस्तियों में सबसे अधिक देखने मिल रही है। आलम ये है कि शहर के कई इलाकों के घरों में नलों से गंदा पानी आने की भी शिकायतें पिछले कुछ दिनों से लगातार आ रही हैं। इसकी मुख्य वजह जानकार बता रहे हैं कि पेयजल वितरण की पाइप लाइन में बारीक लीकेज होगा जिस कारण दूषित व मटमैला पानी नलों के माध्यम से लोगों के घरों तक पहुंच रहा है। जानकारी के अनुसार यातायात पुलिस थाने के पास, रसल चौक, चौथा पुल, यादव कॉलोनी, राइट टाउन, बल्देवबाग, नया मोहल्ला श्रीनाथ्र की तलैया गए्ढाफाटक , गोहलपुर रद्दी चौकी में नाले- नालियों के बीच में से पाइप लाइन होकर गुजरी है।
