विवादित जमीन पर धरने में बैठे विधायक को ग्रामीणो ने खदेड़ा

रीवा। मऊगंज में दो पक्षो के बीच विवादित जमीन को लेकर क्षेत्रीय विधायक प्रदीप पटेल एक पक्ष के तरफ से धरने पर बैठ गये. जिसके बाद उग्र भीड़ ने मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए विरोध शुरू कर दिया. दूसरे पक्ष को यह नागवार गुजरा की विधायक धरने पर बैठे है. गांव की भीड़ ने विरोध को खरी खोटी सुनाते हुए जमकर नारेबाजी की. इस बीच मौके पर पहुंची पुलिस ने विधायक को वहा से सुरक्षित निकाल कर ले गई.

मऊगंज जिले की एक जमीन में लल्लू पाण्डेय एवं विनोद खोडवानी का वर्षो से न्यायालय में विवाद चल रहा था. उक्त भूमि नेशनल हाइवे 135 से जुड़ी हुई थी जिसमें विनोद खोडवानी द्वारा कब्जा करने की कोशिश की गई थी. इस दौरान शनिवार को स्थानीय विधायक प्रदीप पटेल भी मौके पर पहुंचे और वे तम्बू गाडक़र धरने पर बैठ गए. देखते ही देखते लोगों की भीड़ इक_ी हुई और वहां मुर्दाबद के नारे शुरू हो गए. खुद को असुरक्षित महसूस कर विधायक प्रदीप पटेल ने पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंची पुलिस ने विधायक को लोगों की भीड़ से बाहर निकालकर गाड़ी में बैठाकर रवाना कर दिया. मऊगंज स्थित बरांव मोड़ के पास जिस जमीन का विवाद बताया गया है, वह लल्लू पाण्डेय की बताई गई है. उसी भूमि के कुछ रकबे में विनोद खोडवानी द्वारा नक्शा तरमीम कराया गया था, जबकि उनकी जमीन सडक़ से लगी हुई नहीं थी. नक्शा तरमीम हो जाने के बाद एवं हाइवे से लगी होने के चलते उस भूमि की कीमत काफ ी हो गई थी. जिस पर विधायक की शह पर विनोद खोडवानी कब्जा करना चाहते थे. ग्रामीणों की मानें तो उक्त भूमि लल्लू पाण्डेय की है जिस पर विधायक की शह पर दूसरा पक्ष कब्जे की फि राक में था जो नाकाम हो गया.

विधायक पर ग्रामीणो ने लगाया आरोप

विवाद की स्थित उस दौरान निर्मित हुई जब विधायक के कहने पर पुलिस ने एक पक्ष को हिरासत में ले लिया. इसके बाद नेशनल हाइवे 135 पर हंगामा और तनावपूर्ण स्थित बन गई. एक पक्षकार लल्लू पाण्डेय ने आत्महत्या की चेतावनी दे डाली. ग्रामीणो ने आरोप लगाते हुए कहा कि विधायक प्रदीप पटेल अक्सर इस तरह के विवादित जमीन में दखल देते है. जब मामला न्यायालय में चल रहा है तो विधायक को दखल नही देना चहिये.

विधायक ने कहा तमाम आरोप गलत

इस मामले में मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल ने तमाम आरोपो को खारिज करते हुए कहा कि विवाद को शांंत कराने के लिए वह मौके पर पहुंचे थे, उसमें उनका कोई निजी हित नहीं है. दोनों ही पक्ष के लोग उनके हैं. विवादित जमीन का फैसला न्यायालय करेगा, हमारे ऊपर गलत आरोप लगाए गए हैं. उनका उद्देश्य केवल शांति बनाए रखना है. किसी एक पक्ष के समर्थन में बैठने के आरोपो को उन्होने खारिज किया.

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