
ग्वालियर। डॉ. अंबेडकर के चित्र को कथित तौर पर जलाने और अपमानजनक नारे लगाने के मामले में अनिल मिश्रा समेत 4 की जमानत याचिका पर विशेष कोर्ट अब रविवार को सुनवाई करेगा। शनिवार को सुनवाई में मिश्रा के वकील ने तर्क दिए। हालांकि केस से संबंधित दस्तावेज कम होने के कारण सुनवाई कल तक के लिए टाल दी गई। कोर्ट ने इस मामले की डायरी तलब की है।
एडवोकेट अनिल मिश्रा की ओर से पैरवी कर रहे हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन पाठक ने कोर्ट में तर्क दिया कि ग्वालियर पुलिस ने विधि प्रक्रिया का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि मिश्रा एवं अन्य को पहले गिरफ्तार किया गया और उसके बाद एफआईआर दर्ज की गई, जो कानून के विरुद्ध है। इसके साथ ही आरोपियों के परिजनों को भी समय पर गिरफ्तारी की सूचना नहीं दी गई।
पवन पाठक ने यह भी दलील दी कि एट्रोसिटी एक्ट सहित जिन धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है, उनमें नोटिस देकर छोड़े जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद ग्वालियर पुलिस ने हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों की अवहेलना करते हुए आरोपियों को सीधे गिरफ्तार किया। एक जनवरी को डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र को जलाने और अपमानजनक नारे लगाने के मामले में साइबर सेल थाना ग्वालियर में एफआईआर दर्ज की गई थी। इस प्रकरण में अनिल मिश्रा समेत कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
*निचली अदालत से नहीं मिली राहत*
इससे पहले जिला न्यायालय की जेएमएफसी मधुलिका खत्री की कोर्ट ने चारों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। गुरुवार को एडवोकेट अनिल मिश्रा, अमित दुबे, मोहित ऋषीश्वर और गौरव व्यास को गिरफ्तार किया गया था। वहीं, कुलदीप कांकोरिया, अमित भदौरिया और ध्यानेन्द्र शर्मा अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है।
