नई दिल्ली| 03 जनवरी, 2026: कनाडा में रह रहे भारतीय प्रवासियों के लिए साल 2026 एक बड़ी मुसीबत लेकर आया है। इमिग्रेशन विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 10 लाख भारतीय नागरिक इस साल के मध्य तक अपना वैध कानूनी दर्जा खो सकते हैं। इसका मुख्य कारण लाखों वर्क और स्टडी परमिट्स की एक साथ समाप्ति और स्थायी निवास (PR) के नियमों का अत्यंत कठिन होना है। आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की पहली तिमाही में ही 3 लाख से अधिक परमिट खत्म होने वाले हैं, जिससे कनाडा के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में लोग ‘आउट ऑफ स्टेटस’ होकर अवैध प्रवासियों की श्रेणी में आने की कगार पर हैं।
आवास संकट और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव को देखते हुए जस्टिन ट्रूडो सरकार ने अस्थायी निवासियों की संख्या में 43% तक की कटौती का लक्ष्य रखा है। सरकार ने न केवल इंटरनेशनल स्टूडेंट परमिट की संख्या आधी कर दी है, बल्कि शरण आवेदनों और वर्क परमिट विस्तार पर भी कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन सख्त उपायों के कारण हजारों भारतीय युवाओं के सामने अब स्वदेश लौटने या कनाडा में छिपकर अवैध रूप से रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। इस स्थिति ने उन युवाओं के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है जो सालों से कनाडा में अपना घर बसाने का सपना देख रहे थे।
लीगल स्टेटस खोने का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। टोरंटो और ब्रैम्पटन जैसे शहरों में प्रवासियों ने जंगलों में टेंट कॉलोनियां बना ली हैं, जहाँ वे निर्वासन के डर से छिपकर रहने को मजबूर हैं। श्रमिक संगठन ‘यूथ सपोर्ट नेटवर्क’ इस मानवीय संकट के खिलाफ जनवरी में बड़े विरोध प्रदर्शनों की तैयारी कर रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जो लोग कनाडा की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं, उन्हें रहने का अधिकार मिलना चाहिए। यदि सरकार ने कोई बीच का रास्ता नहीं निकाला, तो इतनी बड़ी अवैध आबादी से श्रम बाजार और सुरक्षा व्यवस्था के बिगड़ने का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

