नई दिल्ली | 03 जनवरी, 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2015 में शुरू किया गया ‘प्रगति’ (PRAGATI) प्लेटफॉर्म भारतीय शासन व्यवस्था के लिए ‘गेम-चेंजर’ साबित हुआ है। हाल ही में संपन्न हुई इसकी 50वीं बैठक के रिपोर्ट कार्ड के अनुसार, इस डिजिटल मंच ने अब तक ₹85 लाख करोड़ से अधिक की 3,300 परियोजनाओं की समीक्षा की है। इस तंत्र की सबसे बड़ी सफलता उन प्रोजेक्ट्स को पूरा करना रही है जो दशकों से फाइलों में दबे थे, जैसे 1997 से लंबित बोगीबील रेल-सड़क पुल और नवी मुंबई हवाई अड्डा। प्रधानमंत्री ने बताया कि यह विजन उनके गुजरात के ‘स्वागत’ मॉडल का विस्तार है, जिसने अब राष्ट्रीय स्तर पर विकास की गति को कई गुना बढ़ा दिया है।
प्रगति केवल बैठकों का दौर नहीं, बल्कि एक परिणाम-आधारित त्रिस्तरीय प्रणाली है जिसमें पीएमओ, केंद्रीय सचिव और राज्यों के मुख्य सचिव सीधे जुड़े होते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, परियोजनाओं में पहचाने गए 3,162 तकनीकी व प्रशासनिक मुद्दों में से लगभग 94 प्रतिशत (2,958 मुद्दे) का सफलतापूर्वक समाधान किया जा चुका है। कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन ने बताया कि इस मंच ने केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय की कमी को खत्म कर ‘टीम इंडिया’ की भावना को मजबूत किया है। इसके अलावा, जन शिकायतों के निवारण में भी इसने बड़ी भूमिका निभाई है, जिसमें 36 विभिन्न क्षेत्रों की 7,156 शिकायतों को सुलझाया गया है।
भविष्य की रणनीति पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने ‘विकसित भारत @ 2047’ के संकल्प को दोहराया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले ‘लैंड बैंक’ और पुख्ता ‘डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट’ (DPR) तैयार करना अनिवार्य होना चाहिए। इस 50वीं बैठक में ₹40,000 करोड़ की 5 प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं और ‘पीएम श्री’ योजना की भी समीक्षा की गई। पीएम मोदी ने राज्यों से आग्रह किया कि वे स्थानीय स्तर पर भी ‘प्रगति’ जैसी व्यवस्था को संस्थागत रूप दें, ताकि प्रक्रियाओं को सरल बनाकर ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बढ़ावा दिया जा सके और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।

