नई दिल्ली | 03 जनवरी, 2026: 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त होने के साथ ही अब 8वें वेतन आयोग का काउंटडाउन शुरू हो गया है। 1 जनवरी 2026 से लागू होने वाली इन नई सिफारिशों से केंद्र सरकार के कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 से बढ़कर ₹38,700 होने की प्रबल संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी के चलते निचले स्तर से लेकर कैबिनेट सचिव तक के अधिकारियों के वेतन में बड़ी वृद्धि होगी। हालांकि, सिफारिशों को पूरी तरह जमीन पर उतरने में 18 से 24 महीने लग सकते हैं, लेकिन कर्मचारियों को इसका लाभ जनवरी 2026 से एरियर (बकाया) के रूप में मिलेगा।
7वें वेतन आयोग के अंत तक महंगाई भत्ता (DA) 58% के स्तर पर पहुंच चुका है, जिसे अब नए वेतन ढांचे में मर्ज किए जाने की तैयारी है। इसके साथ ही एचआरए (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य भत्तों की नए सिरे से समीक्षा की जाएगी ताकि बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत रहे। सरकार ने पहले ही ग्रेच्युटी की टैक्स-फ्री सीमा को 20 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर राहत दी है। नए आयोग के गठन के बाद भत्तों का यह नया स्वरूप कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ाने में ‘गेम-चेंजर’ साबित होगा, जिससे उनकी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आएगा।
पेंशनभोगियों के लिए भी 8वां वेतन आयोग बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। 1 अप्रैल 2025 से लागू हुई यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) और नए वेतन आयोग के तालमेल से पेंशनर्स की वित्तीय सुरक्षा और अधिक पुख्ता होगी। इसमें कम से कम 10 साल की सेवा वाले कर्मचारियों को 10,000 रुपये मासिक पेंशन की न्यूनतम गारंटी दी गई है। इसके अलावा, यूपीएस के तहत गारंटीड पेंशन और महंगाई के साथ जुड़ाव का लाभ 8वें वेतन आयोग की नई पेंशन दरों के साथ मिलकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बड़ी राहत प्रदान करेगा। एरियर की गणना भी 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी मानी जाएगी।

