भागीरथपुरा में भय का माहौव
इंदौर:नगर निगम की अव्यवस्थाओं और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही की पोल खोलती भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना में मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है. इससे पूरे शहर में आक्रोश है. वहीं, प्रशासन और नगर निगम पाइप लाइन दुरुस्त करने में लगा है. हमेशा से होता भी यही आ रहा है कि जब तक कोई अप्रिय घटना नहीं घटती, तब तक शासन-प्रशासन जागता ही नहीं है.
वार्ड क्रमांक 11 में हुई इस दुःखद घटना के बाद मृत्यु का आंकड़ा बढ़ते ही जा रहा है, वहीं कई लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. इसको लेकर जब नवभारत की टीम क्षेत्र में पहुंची तो कई हकीकतें सामने आई. प्रभावित क्षेत्र के लोगों में गंदे पानी का डर इतना बना हुआ है कि लोग निगम के टैंकर का पानी पीने में भी डर रहे हैं, फिर भी मजबूरन पानी लेना पड़ रहा है. कई तो मिनरल वॉटर के कंटेनर खरीदकर काम चला रहे हैं. इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद घरों में अब भी नलों से गंदा पानी पहुंच रहा है. बैक लाइनों में गंदगी पसरी दिखाई दे रही है. वहीं, क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से दूषित पानी की समस्या बनी हुई थी, जिसकी शिकायत भी की गई, लेकिन जिम्मेदारों के कानों पर जूं नहीं रेंगी. लापरवाही के चलते कई लोगों की जानें चली गई. घटना को लेकर लोगों में काफी आक्रोश बना हुआ है, लेकिन शासन और पुलिस की कार्रवाई से लोगों में डर बना हुआ है.
यह बोले रहवासी
पानी पीने के बाद यह घटना हुई है. यूं भी क्षेत्र में दूषित पानी तो सभी के घरों में पहुंच रहा है. पीछे की गंदगी तो कल साफ हुई है, वर्ना कोई सफाई कर्मी यहां झांकने नहीं आता था.
– गिरजा माली
बारिश के दिनों से भी ज्यादा गंदा पानी नलों से आ रहा था, जैसे ही नल खोलो गटर का गंदा और बदबूयुक्त पानी आने लगता है. नगर निगम ने सीवरेज की नई लाईन डाली, वह भी अभी तक चौक पड़ी है.
– नर्मदा यादव
ऐसे तो क्षेत्र में कोई भी झांकने तक नहीं आता, लेकिन जब कोई घटना होती है तो अधिकारी और नेता सभी डेरा डाल देते हंै. साफ-सफाई केवल मुख्य मार्ग पर होती है, अंदर के मोहल्लों और गलियों में तो सालों हो जाते हैं, कोई नहीं आता. क्षेत्र में चेंबर जगह-जगह चोक पड़े हैं.
– राहुल सिंह गौड़
पानी इतना दूषित आता है कि बर्तन में भरे पानी में दूसरे दिन कीड़े नजर आने लगते हैं. इसके लिए मैंने खुद दो वर्ष पहले 311 पर शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.
– ईश्वर सिंह कुंभकार
गंदा पानी आते कई साल हो गए हैं, वही पानी पीने को मजबूर हैं. कई बार पार्षद को शिकायत की, लेकिन कोई नहीं सुनता. साफ पानी के लिए दूर जाना पड़ता है या पैसा देकर आरओ वॉटर लेना पड़ता है.
– सीमा महावर
नलों से शुरू में पांच मिनट साफ पानी आता है, बाद में पूरी तरह से गटर का पानी आने लगता है. क्षेत्र के बच्चे अक्सर बीमार रहते हैं. हमें सरकार से यही शिकायत है कि सफाई को लेकर हमारी सुनवाई नहीं होती.
– उषा माली
इस घटना के लिए क्षेत्रीय पार्षद दोषी है, क्योंकि वह समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. वह और कर्मचारी यहां आकर देखते तक नहीं हैं. अगर पहले से ध्यान देते तो आज यह घटना नहीं होती.
– राजू देविकोलिया
नल से पानी भरते सयम महिलाओं ने यह बाटल भरकर मुझे दी घटना से लोगों में इतना आक्रोश है, लेकिन किसको दिखाएं. अधिकारी को दिखाएं तो पुलिस आएगी, डंडे बरसाएगी, ऊपर से राजनीति दबाव, मजदूर वर्ग क्या करे.
– राजराम बोरासी, समाज सेवी
अधिकांश गलियों में हमेशा गंदगी पसरी रहती है, जब से घटना हुई है, तभी से सफाईकर्मी घूम रहे हैं. अगर मैंटेनेंस करते और इतनी सफाई रखते तो यह घटना होती नहीं, छोटे से बड़े अधिकारी सब की लापरवाही है.
– सत्यम नामदेव
पुराने सीवरेज हटाए बिना उसी पर नई लाइन डाली, जिससे लाईन चोक होने की समस्या बढ़ गई, लीकेज होने से पानी दूषित होता है. स्वच्छ जल मानव अधिकार के अंतर्गत आता है, भले बस्ती या कॉलोनी के इंसान हों पानी तो शुद्ध चाहिए.
– अर्चना यादव
