
ग्वालियर। डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर जलाने और आपत्तिजनक नारेबाजी के मामले को लेकर ग्वालियर में भारी तनाव व्याप्त हो गया है। भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी सहित विभिन्न दलित संगठनों ने कलेक्ट्रेट पर ढाई घंटे तक धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को नाकाफी बताते हुए मुख्य आरोपी हाईकोर्ट बार के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट अनिल मिश्रा पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान दलित संगठनों ने चेतावनी दी कि जब तक ठोस कार्रवाई और सख्त आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। ढाई घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम सीबी प्रसाद को ज्ञापन सौंपा। प्रशासन की ओर से कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद धरना समाप्त किया गया। पुलिस ने इस मामले में हिरासत में लिए गए एडवोकेट अनिल मिश्रा सहित चार आरोपियों को पुरानी छावनी थाना से जिला अस्पताल ले जाकर मेडिकल परीक्षण कराया। इसके बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। करीब 4 से 5 घंटे की लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने एडवोकेट अनिल मिश्रा को मेडिकल आधार पर जमानत दे दी जबकि उनके तीन साथियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिए गए हैं।
कोर्ट के फैसले के बाद माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। अनिल मिश्रा के समर्थकों ने बाहर भीमराव अंबेडकर और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की, जिससे स्थिति कुछ देर के लिए गर्मा गई। इस दौरान अनिल मिश्रा ने बयान देते हुए कहा कि उन्होंने जो किया और जो कहा वह सही है, और वह भविष्य में भी वही कदम उठाने के लिए तैयार हैं, चाहे कोर्ट उन्हें कोई भी सजा क्यों न दे। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई कल शनिवार को होगी।
अदालत परिसर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। वहीं इससे पहले अंबेडकर समर्थकों ने एसपी ऑफिस में हंगामा किया और पुलिस के रोकने के बावजूद गेट को धक्का देकर अंदर घुस गए।
उल्लेखनीय है कि बीती रात डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर जलाने और अपमानजनक नारे लगाने के मामले में साइबर सेल थाना ग्वालियर में एडवोकेट अनिल मिश्रा समेत सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने अब तक चार आरोपियों को हिरासत में लिया है। पुलिस के मुताबिक अनिल मिश्रा को उस समय हिरासत में लिया गया था जब वे मुरैना में एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे।
