अदालत ने विधायकों की सैलरी, भत्ते में बढ़ोतरी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

भुवनेश्वर, 23 दिसंबर (वार्ता) ओडिशा उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें राज्य विधानसभा द्वारा मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के मासिक वेतन में लगभग दोगुनी और पूर्व विधायकों की पेंशन में तीन गुना बढ़ोतरी करने संबंधी विधेयक पर सवाल उठाया गया था।

याचिका में ओडिशा विधानसभा द्वारा पारित किये गये विधेयक की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया गया था। ओडिशा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति हरीश टंडन और न्यायमूर्ति एमएस रमन ने विधायी कार्रवाई में दखल देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि ओडिशा विधान सभा सदस्यों का वेतन, भत्ते और पेंशन (संशोधन) विधेयक, 2025, वर्तमान में संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल की मंजूरी के लिए लंबित है।

गौरतलब है कि संशोधन विधेयक में ओडिशा विधान सभा के मौजूदा सदस्यों के वेतन, भत्ते, सुविधाओं और कार्यकाल के बाद/पेंशन लाभों में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव है, जिसके परिणामस्वरूप कई गुना वृद्धि होगी और जिससे राज्य के समेकित कोष पर बड़ा भार पड़ेगा।

राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार कर रहे इस कानून के अनुसार ओडिशा में एक विधायक को 2007 के 1.10 लाख रुपये के मुकाबले अब प्रति माह 3.45 लाख रुपये मिलेंगे। मूल वेतन 35,000 रुपये से बढ़ाकर 90,000 रुपये, निर्वाचन क्षेत्र और सचिवालय भत्ता 20,000 रुपये से बढ़ाकर 75,000 रुपये, वाहन भत्ता 15,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये, निश्चित भत्ता 10,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये, किताबें, पत्रिकाएं और अन्य भत्ता 2,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये, बिजली भत्ता 5,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये और टेलीफोन भत्ता 8,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया गया है।पूर्व विधायकों को अब प्रति माह 1.20 लाख रुपये से अधिक की पेंशन मिलेगी।

अगर विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिल जाती है, तो यह राज्य के निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिये वेतन और पेंशन ढांचे को देश में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा देगा। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विधायकों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी पर लोगों की नाराजगी को देखते हुए यू-टर्न लेते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से इस फैसले पर फिर से विचार करने की अपील की है।

 

 

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