
गंजबासौदा। जय स्तंभ चौक स्थित तहसील के पीछे बना पुराना बस स्टैंड आज बदहाली का शिकार हो चुका है. बस स्टैंड परिसर में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो चुका है और शेष बची जगह पर भी धीरे-धीरे कब्जा बढ़ता जा रहा है. बस स्टैंड से लगी सड़क पर मवेशियों का जमावड़ा रहता है, जिससे यातायात बाधित होता है. वहीं पास ही स्थित नगर पालिका की कांजी हाउस भूमि पर भी अतिक्रमण शुरू हो गया है. आरोप है कि नगर पालिका के कुछ कर्मचारी ही अतिक्रमण को बढ़ावा देकर परिषद को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुराने बस स्टैंड से लेकर क्लब पार्क तक की कीमती भूमि पर व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा सकता है. यहां लगभग 100 से 150 दुकानों का निर्माण संभव है, जिससे नगर पालिका परिषद को प्रति माह लाखों रुपये की आमदनी हो सकती है. इससे न केवल परिषद की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि बेरोजगारों को रोजगार भी मिलेगा और पूरा क्षेत्र साफ-सुथरा व व्यवस्थित नजर आएगा.
नगर पालिका परिषद की बैठक में यह सुझाव भी रखा गया है कि सबसे पहले नपा की भूमि पर दी गई लीज और किराया व्यवस्था समाप्त कर अवैध रूप से कब्जा की गई दुकानों को खाली कराया जाए. इसके बाद निर्माण कार्य शुरू कर, वर्षों से यहां व्यवसाय कर अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले दुकानदारों को प्राथमिकता के आधार पर दुकानें किराए पर दी जाएं, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो.
पूर्व विधायक निशंक जैन ने कहा कि नगर के मध्य स्थित यह भूमि अत्यंत महत्वपूर्ण है. यदि समय रहते इस पर व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स का निर्माण नहीं किया गया तो यह स्थान पूरी तरह अतिक्रमणकारियों के हाथ चला जाएगा. उन्होंने बताया कि पूर्व नगर परिषद में दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव पारित भी हो चुका था, लेकिन बाद में निर्णय बदलने से यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई.
विधायक हरि सिंह रघुवंशी ने इस सुझाव को सराहनीय बताते हुए कहा कि इससे नगर पालिका की आय बढ़ेगी, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और अतिक्रमण की समस्या से मुक्ति मिलेगी. वहीं नगर पालिका परिषद के वरिष्ठ पार्षद सौदान सिंह यादव ने कहा कि कांग्रेस के सभी पार्षद इस मुद्दे पर सहमत हैं और पूरा सहयोग करेंगे.
जनप्रतिनिधियों का मानना है कि यदि सांसद, विधायक और नगर पालिका अध्यक्ष मिलकर ठोस निर्णय लें, तो पुराने बस स्टैंड क्षेत्र का कायाकल्प संभव है. इससे शहर की सुंदरता बढ़ेगी, अतिक्रमण खत्म होगा और नगर पालिका परिषद को स्थायी आय का मजबूत स्रोत मिलेगा.
