नई दिल्ली | 02 जनवरी, 2026: कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के अधीन आने वाली एजेंसी ‘कर्नाटक मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन अथॉरिटी’ (KMEA) की एक ताजा रिपोर्ट ने चुनाव और ईवीएम की विश्वसनीयता पर बड़ा खुलासा किया है। इस स्टडी के अनुसार, राज्य के 91.31% नागरिकों का मानना है कि भारत में चुनाव पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होते हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि करीब 83.61% मतदाताओं ने ईवीएम द्वारा दिए जाने वाले नतीजों को सटीक और भरोसेमंद माना है। यह सर्वे रिपोर्ट ऐसे समय में सार्वजनिक हुई है जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी लगातार भाजपा पर ‘वोट चोरी’ और ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगा रहे हैं, जिससे अब उनकी अपनी ही सरकार की रिपोर्ट उनके दावों के विपरीत खड़ी नजर आ रही है।
दिलचस्प बात यह है कि राहुल गांधी ने कर्नाटक के कलबुर्गी में जिस ‘वोट चोरी’ का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था, उसी कलबुर्गी डिवीजन के लोग चुनाव प्रक्रिया पर सबसे ज्यादा भरोसा जता रहे हैं। सर्वे के अनुसार, कलबुर्गी में 84.67% लोगों ने चुनावी निष्पक्षता पर अपनी सहमति दी है। भाजपा नेता आर. अशोक ने इस रिपोर्ट को आधार बनाकर राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है और इसे ‘कांग्रेस के मुंह पर करारा तमाचा’ करार दिया है। स्टडी में कर्नाटक के 102 विधानसभा क्षेत्रों के 5,100 मतदाताओं को शामिल किया गया था, जिसमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व रहा।
ईवीएम पर भरोसे के बावजूद, स्टडी में चुनावी शुचिता से जुड़े कुछ चिंताजनक पहलू भी सामने आए हैं। सर्वे में शामिल लगभग 44.90% लोगों ने माना कि चुनावों में पैसे का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। वहीं, 16.33% उत्तरदाताओं ने स्वीकार किया कि उन्हें मतदान के दौरान विभिन्न प्रलोभन देने की कोशिश की गई, जिनमें सरकारी योजनाओं का लाभ और नौकरी दिलाने के वादे सबसे प्रमुख थे। यह रिपोर्ट अगस्त 2025 में तैयार की गई थी, जिसे अब आधिकारिक रूप से पेश किया गया है। यह डेटा न केवल चुनावी जागरूकता (SVEEP) कार्यक्रमों की सफलता को दर्शाता है, बल्कि भविष्य के सुधारों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देता है।

