
जबलपुर। पति की मौत के तीन दशक बाद विधवा महिला ने फैमिली पेंशन के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट जस्टिस दीपक खोत की एकलपीठ ने महिला के पक्ष में राहतकारी आदेश जारी किये हैं। एकलपीठ ने महिला को आदेश पारित होने की दिनांक से फैमिली पेंशन देने के आदेश जारी किये।
नरसिंहपुर निवासी कलावती की तरफ से साल 2019 में दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि उसके पति मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में कार्यरत थे। उनकी नियुक्ति 1975 में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रूप में हुई थी। साल 1983 में उन्हे डब्ल्यूसीई नियुक्त कर दिया गया था। नौकरी के दौरान उनकी साल 1986 में मौत हो गयी थी। पति की मौत के बाद कंपनी ने फैमिली पेंशन का आवेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया था कि नौकरी के दस साल पूरे नहीं हुए थे।
एकलपीठ ने पूर्व में पारित आदेश का हवाला देते हुए अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता ने पति की मौत के 32 साल बाद फैमिली पेंशन के लिए नोटिस भेजा था। पति की मौत के बाद तीन दशकों तक याचिकाकर्ता चुप्पी साधे रखी और साल 2018 में जागी थी। याचिकाकर्ता की उम्र को देखते हुए सहानुभूति पूर्वक महिला को आदेश जारी होने से फैमिली पेंशन प्रदान की जाये। याचिकाकर्ता अपने पति की मौत की तारीख से पेंशन के किसी भी बकाया का दावा नहीं करेगी।
