जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने माध्यमिक एवं प्राथमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामले में निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ता उम्मीदवारों के दस्तावेज परीक्षण करवा कर अपलोड कराएं। जस्टिस बीपी शर्मा की अवकाशकालीन एकलपीठ ने मामले पर अगली सुनवाई 9 जनवरी को निर्धारित की है।दरअसल रीवा निवासी गरिमा तिवारी सहित अलग-अलग जिलों के डेढ़ दर्जन से अधिक उम्मीदवारों की ओर से अधिवक्ता आशीष ठाकुर ने पक्ष रखा।
उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने एक दिसंबर 2025 को अंतरिम आदेश दिए थे कि जिन उम्मीदवारों ने अनारक्षित वर्ग के अंतिम चयनित अभ्यर्थी से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, उनके दस्तावेज अपलोड करवा कर उनका वेरिफिकेशन कराएं। उक्त आदेश के बावजूद संबंधित विभागों ने कई पात्र याचिकाकर्ताओं को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशनशन प्रक्रिया से बाहर कर दिया। यह न्यायालय के आदेश की खुली अवहेलना एवं प्रशासनिक मनमानी है। याचिका में भर्ती नियम 2024 के विवादित नियम 12.4 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।
याचिका में बताया गया कि इस नियम के अनुसार आरक्षित वर्ग के ऐसे अभ्यर्थी जिन्होंने पात्रता परीक्षा में 90 से कम अंक प्राप्त किए हैं, उनकी पात्रता चयन परीक्षा के आरक्षित प्रवर्ग में ही मान्य होगी। चयन परीक्षा में मेरिट में आने पर भी ऐसे अभ्यर्थी अनारक्षित प्रवर्ग में चयन हेतु पात्र नहीं होंगे। दलील दी गई कि यह प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के सौरव यादव बनाम उत्तर प्रदेश, तेज प्रकाश पाठक बनाम राजस्थान उच्च न्यायालय और इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ में दिए फैसलों के प्रतिकूल है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।