
इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे पर बुधवार को गहरा दाग लग गया, जब भागीरथपुरा में दूषित पानी ने पांच माह के मासूम अव्यान साहू की जान ले ली। दस साल की मन्नत के बाद जन्मे बच्चे की मौत ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। जिस पानी को जीवन का आधार माना जाता है, वही पानी यहां मौत का कारण बन गया। इस हादसे में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है और 300 से ज्यादा लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं, जबकि जिम्मेदारों की लापरवाही पर सवाल और गहरे होते जा रहे हैं। बुधवार को हालात बेहद चिंताजनक नजर आए। हालात इतने गंभीर हो गए कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को खुद वर्मा नर्सिंग होम पहुंचकर बीमारों से मुलाकात करनी पड़ी.
बुधवार को भागीरथपुरा का माहौल अजीब रहा. गलियों में लोगों की आवाजाही तो दिखी, लेकिन पूरे इलाके में एक सन्नाटे जैसी खामोशी पसरी रही. लोगों का आक्रोश खुलकर सामने नहीं आ पा रहा है, लेकिन चेहरे, आंखें और आपसी बातचीत सिस्टम के प्रति नाराजगी साफ बयान कर रही थी .
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सुबह से ही भागीरथपुरा स्थित संजीवनी क्लिनिक के पास डटे रहे. वे लगातार हालात पर नजर रखते रहे और अधिकारियों से फीडबैक लेते नजर आए. मौके पर महापौर पुष्पमित्र भार्गव, जलकार्य प्रभारी व एमआईसी सदस्य अभिषेक शर्मा, अन्य एमआईसी सदस्य, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त सहित प्रशासन और निगम का पूरा अमला मौजूद रहा. अधिकारी एक के बाद एक क्षेत्र का दौरा करते रहे, लेकिन लोगों के मन में बैठा डर और गुस्सा कम होता नजर नहीं आया.
बुधवार को हालात और बिगड़ गए, जब पांच माह के अव्यान साहू सहित दो अन्य लोगों की मौत की सूचना मीडिया को मिली. अव्यान साहू की मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया. उसकी मां का कहना है कि अव्यान दस साल की मन्नत के बाद हुआ था. डॉक्टरों ने उसे बाहरी दूध देने का बोला था जिसके चलते उसके दूध में पानी मिला कर दिया जाता था, क्या पता था कि यही पानी उसकी मौत का कारण बन जाएगा. एक अन्य बुजुर्ग मृतक का नाम जीवनलाल बरेडे है.
पीने के पानी की स्थिति को लेकर नगर निगम हरकत में आया लेकिन भागीरथपुरा में हालात फिलहाल सामान्य नहीं हैं. लोग साफ पानी, पारदर्शी जांच और जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन इलाके में पसरी खामोशी बता रही है कि भरोसा अभी भी डगमगाया हुआ है.
बीमारों से मिलने पहुंचे मुख्यमंत्री
डॉक्टरों को बेहतर इलाज के दिए निर्देश
भागीरथपुरा में दूषित पानी से बीमार हुए लोगों का हाल जानने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शाम को वर्मा नर्सिंग होम पहुंचे. यहां उन्होंने भर्ती 12 मरीजों से मुलाकात कर उनकी तबीयत और इलाज की जानकारी ली. मुख्यमंत्री ने मरीजों से बातचीत कर उनका हौसला बढ़ाया और जल्द स्वस्थ होने की कामना की. मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों से उपचार की स्थिति पर चर्चा की और स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी मरीजों को समय पर और बेहतर इलाज मिले. किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन तुरंत उपलब्ध कराए जाएं, ताकि मरीजों के इलाज में कोई कमी न रहे. सीएम के दौरे के दौरान अस्पताल में प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी मुख्यमंत्री को दी गई.
हाईकोर्ट हुई सख्त, सरकार से दो दिनों में मांगी रिपोर्ट
भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने के मामले ने हाईकोर्ट का ध्यान खींचा है. जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने पूरे घटनाक्रम को गंभीर मानते हुए प्रदेश सरकार से दो जनवरी तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए. साथ ही कोर्ट ने पीड़ितों के इलाज को लेकर भी अहम आदेश जारी किए हैं.
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की सप्लाई के चलते मौतों और बीमारी के मामलों को लेकर हाईकोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दाखिल की गई थीं. इनमें एक याचिका एडवोकेट रितेश इंसानी द्वारा, जबकि दूसरी याचिका पूर्व पार्षद महेश गर्ग और प्रमोद द्विवेदी की ओर से एडवोकेट मनीष यादव के माध्यम से लगाई है. याचिकाकर्ताओं की ओर से मुख्य न्यायाधीश से मामले में अर्जेंट सुनवाई की मांग की गई थी. याचिकाओं में कहा गया कि दूषित पानी से हुई मौतें और बीमारी आम नागरिकों की जान के साथ घोर लापरवाही का मामला है. इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय कर उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना जरूरी है. शीतकालीन डिविजन बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को निर्देश दिए कि वह अब तक की गई कार्रवाई, जिम्मेदारी तय करने की स्थिति और आगे की कार्ययोजना को लेकर दो जनवरी तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करे. इसके साथ ही कोर्ट ने दूषित पानी से बीमार हुए सभी पीड़ितों का निशुल्क और समुचित इलाज सुनिश्चित करने के भी आदेश दिए हैं.
