
रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा द्वारा जारी किए गए बीए, बीएससी, बीसीए प्रथम और द्वितीय वर्ष के परीक्षा परिणाम में गंभीर अनियमिकता और आरटीआई प्रक्रिया सहित शुल्क से संबंधित आपत्ति पर त्वरित सुधार के लिए आज कुल सचिव को छात्रों ने ज्ञापन सौंपा.
छात्रों ने बताया कि हाल ही में विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के बीए, बीएससी एवं बीसीए एवं प्रथम और द्वितीय वर्ष के परीक्षा परिणाम घोषित किए गए हैं, जिनमे असामान्य रूप से अत्यधिक संख्या में छात्रों को अनुतीर्ण दर्शाया गया है. यह स्थिति सामान्य शैक्षणिक प्रवृत्ति से परे है और मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है. छात्रों ने कहा कि यदि परीक्षा परिणामी में त्रुटि या लापरवाही पाई जाती है, तो उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी विश्वविद्यालय ओर उसकी मूल्यांकन प्रणाली की होती है. न कि छात्र-छात्राओं की. ऐसी स्थिति में छात्र-छात्राओं को अपनी ही उत्तरपुस्तिकाओं की सत्यता जाचने के लिए आरटीआई अधिनियम के अंतर्गत शुल्क जमा करने के लिए विवश करना अनुचित एवं अन्यायपूर्ण है.छात्रों का आरोप है कि किसी अन्य की त्रुटि या लापरवाही का आर्थिक दड छात्र-छात्राओं से वसूला जा रहा है, जबकि छात्र पहले ही परीक्षा शुल्क, विश्वविद्यालय शुल्क एवं अन्य शैक्षणिक शुल्क का भुगतान का चुके हैं. इसके अतिरिक्त, आरटीआई अधिनियम के अंतर्गत उत्तरपुस्तिका प्राप्त करने की 30 दिवस समय-सीमा के कारण समय पर उत्तरपुस्तिका उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जबकि आगामी परीक्षा के लिए आवेदन पत्र भरने की अंतिम तिथि 5 जनवरी 26 निर्धारित है. यदि उत्तर पुस्तिकाएँ विलंब से प्राप्त होती हैं, तो छात्र परीक्षा फॉर्म भरने से बंचित रह जाएंगे, जो उनके शैक्षणिक भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ होगा. इस लिए संबंधित पाठ्यक्रमों के परीक्षा परिणामों की तत्काल पुन: समीक्षा पुनर्मूल्यांकन करवाई जाए. परिणामों में सभावित त्रुटि को दृष्टिगत रखते हुए छाङछात्राओं को आरटीआई के अंतर्गत उत्तरपुस्तिका प्रतिलिपि निशुल्क अथवा त्वरित विशेष प्रक्रिया के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए.
