सिर पर खेती आंदोलन: पांगरी जलाशय के डूब प्रभावित किसानों का जन आंदोलन

बुरहानपुर:पांगरी बांध प्रभावित तीनों गांव नागझिरी, पांगरी, बसाली के किसानों ने उतावली नदी के किनारे एक अनोखा आंदोलन किया इस आंदोलन में सैकड़ो किसानों ने जमा हो करके अपने सिर के ऊपर में पौधे उगाए और सिर पर खेती नामक प्रतीकात्मक आंदोलन किया । खकनार तहसील के पांगरी बांध परियोजना में अनेकों गड़बड़ी के चलते, किसान- प्रशासन बीते 3 वर्षों से आमने-सामने हैं । किसान सीधे तौर पर दो गुना मुआवजा एवं सांत्वना राशि कि मांग 1013 के भुमि अधिग्रहण कानून के मुताबिक चाहते हैं ,वहीं सरकार सिर्फ एक गुना मुआवजा एवं सांत्वना राशि कि बात दोहरा रहीं हैं उस पर भी न्यूनतम गाइडलाइन के साथ।

पांगरी बांध प्रभावितो का नेतृत्व कर रहे डॉ.रवि कुमार पटेल ने कहा की सरकार हमारी जमीन औने पौने दाम में हमसे छीन रही है और हमें गैरकानूनी तरीके से जमीन से बेदखल कर रही है इतने कम मुआवजे में हमारा गुजारा कैसे करेंगे ? हमें जमीन नहीं मिलेगी इसीलिए हम सिर पर खेती आंदोलन के जरिए सरकार को साफ संदेश देना चाहते हैं कि भुमि अधिग्रहण कानून के मुताबिक हमें धारा 26 एवं सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशानुसार उच्चतम प्रमाणिक मूल्य के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में दोगुना मुआवजा मिलना चाहिए अलावा इसके धारा 29 के अनुसार तोषण का अधिकार अर्थात सांत्वना राशि भी मिलनी चाहिए । इस रुपकात्मक शांतिपूर्ण आंदोलन से सैकड़ो किसानों ने अपनी व्यथा को भाषा दी।
और सरकार को आगाह किया कि अगर किसानों के साथ बेईमान की गई तो आक्रामक तरीके से आंदोलन होगा इसकी सर्वस्व जिम्मेदारी सरकार की होगी इस आंदोलन में प्रमुखता से नंदू पटेल,मान्या भिलावेकर, शुमला, ओमप्रकाश विज्जु चौकसे, मामराज, राजूभाई नवल, राहुल राठोड़,मंसाराम ,माधो नाटो बद्री वास्कले ,श्रीराम, सालिकराम , संजय चौकसे, श्रीकिशन, पन्ना पटेल,रुपला, कालु भाई,देवा,विजय,आ
आदि अन्य किसानों ने शांतिपूर्ण ढंग से निवेदन किया।

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