
सीधी। शीतलहर के चल रहे प्रकोप से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। हालात यह है कि तीन दिनों से दिन में भी थर्मामीटर 7 डिग्री न्यूनतम पर लुढक़ चुका है। स्थिति यह है कि लोगों के हांथ ठिठुरन एवं गलन के चलते जवाब देते रहे। मौसम को देखते हुए निश्चित ही गलन का असर और बढऩा माना जा रहा है तथा थर्मामीटर और तेजी से लुढक़ना शुरू हो जाएगा।
यह माना जा रहा है कि जनवरी के आगाज के साथ ठण्ड पूरे रिकार्ड तोडऩे में आमादा हो जायेगी। नए वर्ष के आगाज के साथ ही ठंड का असर बढऩा शुरू होगा और शीतलहर लोगों की मुसीबतों को और बढ़ायेगी। लोग अलाव एवं हीटर का सहारा लेते हुए राहत तलाश रहे हैं। यदि इनके सामने से हटे तो सीधे बिस्तर में ही ठिठुरन और गलन से राहत मिल रही है। भीषण ठंड के कारण जन जीवन जहां पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है वहीं जीव-जंतु भी काफी परेशानियों में फंसे हुए हैं। सडक़ों में घूमते आवारा मवेशियों में भी इन दिनों भारी ठिठुरन एवं गलन के चलते काफी बेचैनी देखी जा रही है। उन्हें तो खुले आसमान के नीचे ही कड़ाके की ठंड में चौबीस घंटे रहने की मजबूरी बनी हुई है। यदि ठंड का प्रकोप इसी तरह बढ़ता रहा तो निश्चित ही मरीजों की संख्या भी काफी बढ़ जाएगी। वर्तमान में छोटे बच्चों एवं बुजुर्गों में ठंड लगने के मामले सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों के समक्ष छोटे बच्चे एवं बुजुर्ग मरीज ही इन दिनों सबसे ज्यादा बीमार होकर पहुुंच रहे हैं। बुखार, पेट दर्द, सीना दर्द, सर्दी, खांसी, जुखाम के मरीज सबसे ज्यादा पहुुंच रहे हैं। डॉक्टर भी यही सुझाव दे रहे हैं कि ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े पहने एवं आग का सहारा लें।
गत 6 दिनों का तापतान
दिनांक अधिक तम न्यूनतम
21 दिस. 19 09
22 दिस. 20 09
23 दिस. 21 08
24 दिस. 21 08
25 दिस. 18 07
26 दिस. 19 07
26 दिस. 22 07
तापमान डिग्री सेल्सियस में
शीतलहर से बचाव के लिए एडवाइजरी
आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तरुण राठी ने शीतलहर से बचाव के लिए समस्त चिकित्सा महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, सीएमएचओ और सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक द्वारा मैदानी कर्मियों एवं आम नागरिकों को शीतलहर के लक्षण, बचाव उपाय के संबंध में जागरूक करने और आवश्यक तैयरियां रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश में माह दिसम्बर एवं जनवरी के दौरान शीतलहर का प्रकोप प्राय: देखने को मिलता है। इस अवधि में कई क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान 5-7 डिग्री सेल्सियस अथवा उससे कम दर्ज किया जाता है, जिससे जन-मानस के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पडऩे की आशंका रहती है। अत्यधिक ठंड के कारण हाइपोथर्मिया, फ्रॉस्टबाइट जैसी शीतजनित बीमारियां तथा विषम परिस्थितियों में मृत्यु की संभावना भी हो सकती है। शीतलहर के दौरान विशेष रूप से 65 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजन, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे, हृदय एवं श्वसन रोग से पीडि़त व्यक्ति, बेघर लोग, खुले स्थानों व निर्माण स्थलों पर कार्यरत श्रमिक, सडक़ किनारे रहने वाले व्यक्ति एवं छोटे व्यवसायी अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। शीतलहर एक मौसम संबंधी घटना है जिसमें न्यूनतम तापमान में अचानक गिरावट आती है, ठंडी हवाएं चलती हैं तथा पाला या बर्फ जमने जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। स्थानीय रेडियो, टीवी एवं समाचार पत्रों के माध्यम से मौसम की जानकारी नियमित रूप से लेते रहें। पर्याप्त मात्रा में गर्म कपड़े पहनें तथा कई परतों में वस्त्र धारण करें।
