चैकपोस्ट बंद, फिर भी वसूली जारी? हनुमना वीडियो से परिवहन विभाग पर फिर उठे सवाल

भोपाल। मध्यप्रदेश में 1 जुलाई 2024 से चैकपोस्ट बंद किए जाने के सरकारी दावे के बावजूद परिवहन विभाग पर अवैध वसूली के आरोप लगातार लगते रहे हैं। ताजा मामला रीवा जिले के हनुमना चैकपोस्ट का है, जहां अवैध वसूली का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग और मंत्री दोनों सवालों के घेरे में आ गए हैं।

इस मुद्दे पर परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश में चैकपोस्ट बंद किए जा चुके हैं और केवल चलित जांच तंत्र ही लागू है, जिसे सख्ती से चालू रखा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो ट्रक चालक नियमों का पालन नहीं करेगा, उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन अवैध गतिविधि और वसूली को विभाग किसी भी स्थिति में प्रोत्साहित नहीं करता।

मंत्री ने यह भी दावा किया कि अवैध वसूली की किसी भी शिकायत पर केवल विभागीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से भी जांच करवाई जाती है। उनके अनुसार अब तक 13 कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है, कई के तबादले किए गए हैं और करीब 6 प्रतिशत कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है। मंत्री ने इसे बड़ी कार्रवाई बताते हुए कहा कि अवैध गतिविधियों को संरक्षण नहीं दिया जाएगा।

हालांकि मंत्री की इस सफाई के बीच सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब चैकपोस्ट बंद हैं, तो फिर उन्हीं स्थानों पर अवैध वसूली के वीडियो कैसे सामने आ रहे हैं। हनुमना चैकपोस्ट का वायरल वीडियो विभागीय दावों पर सीधा प्रश्नचिन्ह लगाता है और यह संकेत देता है कि व्यवस्था कागजों में भले बदली हो, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है।

परिवहन मंत्री ने यह भी कहा कि यदि कोई पेशेवर या स्थानीय स्तर के आपराधिक प्रवृत्ति के लोग अधिकारियों को जबरदस्ती परेशान करेंगे, ब्लैकमेल करेंगे या फर्जी वीडियो बनाएंगे, तो विभाग उनके दबाव में नहीं आएगा और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर उन पर कार्रवाई करेगा। लेकिन इस बयान के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि हर वायरल वीडियो को फर्जी बताना कहीं न कहीं विभागीय जवाबदेही से बचने की कोशिश तो नहीं है।

उल्लेखनीय है कि मंत्री उदय प्रताप सिंह अपने दो वर्षों के कार्यकाल का ब्योरा प्रेसवार्ता के माध्यम से दे रहे थे। उसी दौरान हनुमना चैकपोस्ट से जुड़ा अवैध वसूली का वीडियो सामने आया, जिसने पूरी प्रेसवार्ता की दिशा ही बदल दी और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

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