बाघ,तेंदूआ, भालू , भेडिय़ा की उपस्थिति के प्रमाण, अब शाकाहारी वन्यप्राणियों की होगी गणना

बुरहानपुर / नेपानगर: गुरूवार से जिले में बाघ गणना शुरू की गई है। पहले और दूसरे दिन कईं वन्यप्राणियों की उपस्थिति के प्रमाण मिले हैं। इसमें बाघ, तेंदुआ,भालू, भेडिय़ा सहित लेकर कईं वन्यप्राणी शामिल हैं। गौरतलब है कि करीब 4 साल बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून की ओर से बाघ गणना कराई जा रही है। इसके लिए जिले के वनकर्मियों को पिछले दिनों प्रशिक्षित किया गया था। यह गणना लगातार छह दिन चलेगी। पहले तीन दिन गुरूवार से शनिवार मांसाहारी और दूसरे तीन दिन रविवार से मंगलवार तक शाकाहारी वन्यप्राणियों की गणना होगी।

पहले ही दिन मिलने लगे वन्यप्राणियों के कईं प्रमाण:-18 से 20 दिसंबर तक मांसाहारी वन्यप्राणियों की गणना हो रही है। 21 से 23 दिसंबर तक शाकाहारी वन्यप्राणियों की गणना होगी। खास बात यह है कि पहले ही दिन जिले में टाइगर, तेंदुआ, भालू सहित अन्य वन्यप्राणियों के पगमार्क मिले हैं। वनकर्मी प्रतिदिन 5 किमी की परिधि में गणना कर रहे है। वन्यप्राणियों के साक्ष्य एकत्रित किए जा रहे हैं। इसमें खरोंच के निशान, पगमार्क, शिकार के आधार पर उनकी पहचान भी की जा रही है।

क्षेत्र की 26 बीट में गणना:- वन विभाग की टीम द्वारा नेपानगर नावरा रेंज की 26 बीट में गणना की जा रही है। यहां भी पहले दिन तेंदुआ, भेडिय़ा सहित अन्य वन्यप्राणियों के पगमार्क मिले हैं। यह गणना चार चरणों में की जाती है। पहले चरण में मैदानी सर्वेक्षण के दौरान बाघों और अन्य मांसाहारी वन्यजीवों के पद चिन्ह, मल, पेड़ों पर या जमीन पर उनके पंजों की खरोंच के निशान, शिकार के अवशेष संकलित या दर्ज किए जाते हैं।

दूसरे चरण में सैटेलाइट आधारित रिमोट सेंसिंग डाटा के साथ जोडक़र वन की क्षति,अवैध कब्जे, वन्यजीवों के साथ जोडक़र वन की क्षति,वन्यजीवों के कॉरिडोरए मानवीय दखलंदाजी का आंकलन किया जाता है।तीसरे चरण में चयनित ग्रिड में कैमरे से वन्यजीवो की निगरानी की जाती है। बाघों की खास धारियों के आधार पर उनकी पहचान कर कैप्चर,रिकैप्चर तकनीक से उनकी संख्या का अनुमान लगाया जाता है। चौथे चरण में सभी चरणों से प्राप्त आंकड़े,जानकारी सांख्यिकीय विश्लेषण कर अंतिम वैधानिक रिपोर्ट तैयार की जाती है।

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