हादी के जनाजे में हजारों लोग शामिल हुए

ढाका, 20 दिसंबर (वार्ता) बंगलादेश की राजधानी ढाका में शनिवार को ‘जुलाई विद्रोह’ के प्रमुख चेहरे शरीफ उस्मान हादी की अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए।

प्रमुख राजनीतिक दल अवामी लीग विरोधी और भारत विरोधी बयानों के लिए पहचाने जाने वाले हादी को बंगलादेश की अंतरिम सरकार ने ‘शहीद’ का दर्जा दिया है।

बंगलादेश ने इंकलाब मंच के प्रवक्ता हादी के लिए राजकीय शोक मनाया। हादी की दो दिन पहले हुई मौत के बाद देश भर में हिंसा की लहर फैल गई थी।

राष्ट्रीय संसद परिसर में आयोजित अंतिम संस्कार में अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस, सलाहकार परिषद के सदस्य, सेना प्रमुख और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सरकार ने 20 दिसंबर को राष्ट्रीय शोक घोषित किया था। इसके तहत सरकारी और निजी भवनों सहित विदेशों में स्थित दूतावासों में राष्ट्रध्वज आधा झुका रहा। मुख्य सलाहकार यूनुस ने हादी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्हें कभी भुलाया नहीं जाएगा और वे पीढ़ियों तक प्रेरणा बने रहेंगे।

नमाज-ए-जनाजा के बाद हादी के पार्थिव शरीर को जुलूस के रूप में ढाका विश्वविद्यालय लाया गया और केंद्रीय मस्जिद के पास राष्ट्रीय कवि काजी नजरुल इस्लाम की कब्र के बगल में दफनाया गया। सुरक्षा कारणों से विश्वविद्यालय के सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए थे और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस व सेना तैनात की गई थी। हादी के बड़े भाई अबू बकर सिद्दीकी ने जनाजे का नेतृत्व किया और आठ दिन बाद भी हत्यारों की गिरफ्तारी न होने पर प्रशासन की विफलता पर सवाल उठाए।

ढाका निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार रहे ओसमान हादी को 12 दिसंबर को ढाका के पुराने पलटन इलाके में रिक्शा से यात्रा के दौरान मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने सिर में गोली मार दी थी। उन्हें बेहतर इलाज के लिए सिंगापुर भेजा गया था, लेकिन 18 दिसंबर की रात उन्होंने दम तोड़ दिया। हादी की मृत्यु के बाद ढाका सहित कई जिलों में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने ‘द डेली स्टार’ और ‘प्रथम आलो’ अखबारों के कार्यालयों तथा छायानाट सांस्कृतिक केंद्र में आगजनी व तोड़फोड़ की।

शाहबाग चौराहे पर जमा भीड़ ने इस स्थान का नाम बदलकर ‘हादी चत्तर’ करने की मांग की और भारत विरोधी नारे लगाए।

हादी अपने पीछे पत्नी और आठ महीने का बच्चा छोड़ गए हैं।

 

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