केंद्र की सुविधा, एमपी में अभी भी इंतज़ार
साक्षी केसरवानी
भोपाल:मध्य प्रदेश सरकार ने अब तक केंद्र सरकार के वर्ष 2018 के उस फैसले को अपने सेवा नियमों में शामिल नहीं किया है, जिसके तहत दिव्यांग बच्चों की माताओं को बच्चे की आयु सीमा से परे चाइल्ड केयर लीव देने का प्रावधान किया गया है। नियमों में बदलाव न होने के कारण प्रदेश की शासकीय महिला कर्मचारी इस महत्वपूर्ण सुविधा से वंचित हैं। जिसको लेकर कई शासकीय महिला कर्मचारियों ने सीएम हेल्पलाइन सहित शासन को भी नियमों में सुधार हेतु पत्र लिखा है.
बता दें प्रदेश में शासकीय महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव के तहत कुल 730 दिन का अवकाश दिए जाने का प्रावधान है। सामान्य बच्चों की माताओं को यह सुविधा, बच्चे की 18 वर्ष की आयु तक मिलती है, जबकि दिव्यांग बच्चों की माताओं को अधिकतम 22 वर्ष की आयु तक ही अवकाश दिया जा रहा है।वर्ष 2018 में भारत सरकार ने संतान पालन अवकाश के नियमों में संशोधन करते हुए दिव्यांग बच्चों की माताओं के लिए आयु सीमा समाप्त कर दी थी। केंद्र सरकार ने यह निर्णय इस आधार पर लिया था कि दिव्यांग बच्चे की देखभाल आजीवन चलने वाली जिम्मेदारी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए कई राज्यों ने अपने सेवा नियमों में यह व्यवस्था लागू भी कर दी है, लेकिन मध्य प्रदेश में अब तक इस दिशा में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
प्रदेश की महिला कर्मचारियों का कहना है कि दिव्यांग बच्चे वयस्क होने के बाद भी पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं हो पाते। उन्हें इलाज, पुनर्वास, सुरक्षा और दैनिक जीवन में लगातार सहयोग की आवश्यकता होती है। ऐसे में आयु सीमा तय कर चाइल्ड केयर लीव से वंचित किया जाना व्यावहारिक नहीं है। महिला कर्मचारियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि केंद्र सरकार के फैसले को अपनाते हुए चाइल्ड केयर लीव के नियमों में आवश्यक संशोधन किया जाए।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य प्रदेश सरकार इस निर्णय को लागू करती है, तो यह संवेदनशील और सकारात्मक शासन का एक मजबूत उदाहरण होगा।
इनका कहना है
मेरे संज्ञान में अभी तक ऐसी कोई जानकारी नहीं है, आपके माध्यम से मुझे शाशकीय कर्मचारियों की इस समस्या के बारे में पता चला है. मैं इस पर जानकारी लेकर आवश्यक कदम उठाऊंगा।
डॉ अजय खेमरिया, आयुक्त, सामाजिक न्याय, भोपाल
