मनरेगा से गांधी का नाम बदलने का सरकार ने किया आपराधिक काम

नयी दिल्ली, 17 दिसंबर (वार्ता) विपक्ष ने मोदी सरकार को गरीब और किसान विरोधी करार देते हुए आरोप लगाया है कि उसने ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार की गारंटी और समानता को बढ़ावा देने वाले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना-मनरेगा को पहले कमजोर करने का काम किया और अब पूरी तरह से खत्म करने का अपराध किया है जिसके लिए उसे देश का गरीब माफ नहीं करेगा।

कांग्रेस के जय प्रकाश ने बुधवार को लोकसभा में “विकसित भारत रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) वीबी जी रामजी (विकसित भारत जी राम जी) विधेयक 2025” पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि मनरेगा का नाम बदलने का सरकार ने आपराधिक काम किया है। मनरेगा योजना से गांधी जी का नाम हटाकर मोदी सरकार ने जता दिया है कि उसको गांधी नाम से नफरत है इसलिए उसने इस योजना का नाम बदला है। ऐसा लगता है कि मोदी सरकार को योजनाओं का सिर्फ नाम बदलने का शौक है लेकिन उसे यह भी समझना चाहिए कि केवल नाम बदलने से कुछ होने वाला नहीं है बल्कि गरीबों के हित में काम करने होते हैं। सरकार गरीबों के हित के लिए गंभीर होती तो इस योजना को वह खेती से जोड़ती जिससे किसान और श्रमिक दोनों को फायदा होता। सरकार की नीयत ठीक होती तो रोजगार के दिन 125 नहीं बल्कि 150 से ज्यादा करती लेकिन यहां सिर्फ गुमराह करने का काम हुआ है और महात्मा गांधी के नाम से जो नफरत है उसके लिए नाम बदलने के काम को अंजाम दिया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार को गरीब और दलित विरोधी बताया और कहा कि दो साल से मनरेगा श्रमिकों को पैसा नहीं दिया गया है। सरकार को बताना चाहिए कि गरीबों को मनरेगा का पैसा क्यों नहीं दिया गया । यहां महात्मा गांधी के नाम बदलने का षडय़ंत्र किया गया है और ऐसा कर सरकार सिर्फ नाम बदल रही है और गरीबों के लिए कोई काम नहीं कर रही है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि मनरेगा कानून जब 2005 में लाया गया तो विपक्ष की आपत्ति के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की सरकार ने इस विधेयक को संसदीय प्रवर समिति को भेज दिया था। अब इस विधेयक से महात्मा गांधी का नाम बदलने का बहुत बड़ा अपराध है। दुनिया का जो भी राष्ट्राध्यक्ष हिंदुस्तान आता है तो महात्मा गांधी की मूर्ति पर माला चढ़ाता है क्योंकि गांधी जी ने देश के गांव में गरीबों को सक्षम बनाने का सपना देखा था। उनके नाम से इस विधेयक को लाने का मकसद इसी सपने को पूरा करना था और जब विधेयक पारित हुआ तो इसमें रोजगार की गारंटी देकर गांव से पलायन रोकने की पहल शुरु की गई। मनरेगा के जरिए गांव के लोगों को रोजगार की गारंटी दी गई और मनरेगा के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में समानता का रास्ता प्रशस्त किया गया और सबको समान काम के बदले समान भुगतान करने का काम हुआ।

भाजपा के बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारें देश में अन्याय को प्रश्रय देती रही है लेकिन मनरेगा कानून में संशोधन करके अब इस विधेयक के जरिए गांव में 125 दिन का दिन का रोजगार देने की गारंटी दी गयी है। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा में भ्रष्टाचार होता रहा है और कांग्रेस की सरकार ने इसके जरिए अपनी जेब भरने का काम किया है। तब फर्जी रजिस्टर से मनरेगा के पैसे का इस्तेमाल श्रमिकों के लिए नहीं नेता खुद के लिए करते रहे हैं लेकिन मोदी सरकार ने इसमें भुगतान के नियम में पारदर्शी बदलाव किया और ग्रामीणों को सौ नहीं 125 दिन के रोजगार देने की व्यवस्था की है।

श्री अग्रवाल का कहना था कि वीबी-जीरामजी योजना के जरिए गांवों का कायाकल्प किया जाएगा और इसमें केंद्र की तरफ से 60 फीसदी केंद्र देगा जबकि 40 फीसदी विकास का काम राज्य सरकार के द्वारा कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि जब विकसित भारत का विकसित गांव होगा तो गांव का व्यक्ति शहर की तरफ भागकर नहीं आएगा और उसे उसके गांव में ही रोजगार के अवसर सुलभ हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में डेढ़ लाख करोड़ रुपए गांव के विकास में सरकार खर्च करने जा रही है और इससे गांवों का कायाकल्प हो जाएगा और विकास की धारा प्रवाहित होगी तथा गांव से पलायन रोका जा सकेगा।

 

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