छिंदवाड़ा: प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए विभिन्न योजनाएं का संचालन कर रही है लेकिन क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और शासन के आलाधिकारियों की लापरवाही के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं का क्रयानव्यन नही हो पा रहा है. ग्रामीण कभी जनप्रतिनिधि तो कभी अधिकारियों के चक्कर लगा रहे है इसके बाद भी उन्हें सुविधाएं नही मिल पा रही है. आज इसका सीधा उदहारण कलेक्ट्रेट कार्यालय में देखने को मिला. आज ग्राम भांडखापा के ग्रामीण सिचाई के लिए पानी के लिए और ग्राम भोंडरपानी के ग्रामीण सड़क की समस्या को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और उन्होंने कलेक्टर से शिकायत कर समस्यां का निराकरण करने की मांग की है.
ग्राम भोंडरपानी के ग्रामीणों ने बताया कि हमारा ग्राम भोंडरापानी, ग्राम रोझनी से लगभग 4-5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. हमारे ग्राम की आबादी लगभग 400 है, किंतु दुर्भाग्यवश आज तक ऑडरापानी से रोझनी तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है. सड़क न होने के कारण ग्रामवासियों को विशेषकर वर्षा ऋतु में अत्यंत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. कच्चा मार्ग कीचड़ से भर जाता है, जिससे आवागमन लगभग असंभव हो जाता है. ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के मौसम में बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, जिससे उनकी शिक्षा प्रभावित होती है.
बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को इलाज के लिए समय पर अस्पताल ले जाना कठिन हो जाता है. सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को होती है. प्रसव के समय एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाली, जिसके कारण उन्हें 4-5 किलोमीटर तक खाट या अन्य साधनों से ले जाना पड़ता है, जो उनके एवं शिशु के जीवन के लिए जोखिमपूर्ण होता है. ग्राम भोडरापानी एक आदिवासी बहुल ग्राम है, जो सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है. इस दृष्टि से भोंडरापानी से रोझनी तक पक्की सड़क निर्माण अत्यंत आवश्यक है. सड़क की मांग को लेकर ग्रामीणों ने जनसुनवाई में आवेदन कर क्षेत्र में सड़क निर्माण कराने की कलेक्टर से गुहार लगाई है.
सिंचाई नहीं हुई तो सूख जाएंगी फसलें
भांडखापा के रहने वाले तकरीबन दो दर्जन से अधिक किसान बुधवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे. जहां उन्होंने फसलों में सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने से नाराजगी व्यक्त करते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है. किसान रामभरोस चौरिया ने बताया कि भांडखापा, बीसापुर, कुकड़ा और पिंडरई पंचायत के तकरीबन 3 हजार एकड़ से अधिक खेती सिंचित होती है. नहर खापाभांड से परसगांव, नौलाझिर, ब हनी, मुडिय़ाखेड़ा होते हुए चांद की ओर निकल गई. ऐसे में भांडखापा का एक हिस्सा ऐसा है. जहां नहर नहीं होने के कारण तकरीबन 100 फिट पाइप डालकर डेम तक पानी पहुंचाया जाता है.
जिससे किसान फसलों में सिंचाई कर सकें. इस साल किसानों को नहर से पानी नहीं छोड़ा गया है. इससे डेम में पानी नहीं है. वही गेहूं, चना, बटाना, लहसुर, आलू सहित अन्य फसलें तैयार हो गई है. फसलों को पानी की महती आवश्यता है. ऐसे में डेम का कंठ सूखा होने के कारण किसान अपनी फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे है. किसानों ने कहा है कि पाइप लाइन हटाकर नहर बनवा दी जाए. सरपंच नंदलाल पहलवान ने बताया कि इस मामले को लेकर तत्कालीन सीएम शिवराजसिंह चौहान के पास पहुंचे थे. उन्होंने उस समय भरोसा दिलाया था कि सभी किसानों को नहर से पानी मिलेगा. उन्होंने अधिकारियों को इसके लिए निर्देश भी दिए थे. इसके बाद भी अधिकारियों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया.
कलेक्टर से की कार्रवाई करने की मांग
महिला पुराना बैल बाजार की निवासी है, उसके पति जावेद खान उम्र 37 साल निवासी मंगली बाजार वार्ड नं. 21 डब्ल्यूसीएल विभाग में महादेवपुरी खदान खिरसाडोह में कार्यरत है. उसका प्रकरण न्यायालय में भरण-पोषण वसूली के पश्चात न्यायालय द्वारा वसूली/जेल वारंट जारी करने आदेश किया गया है. 29 नवबंर को पेशी में जावेद खान को अनुपस्थित एवं 20 दिसंबर 2017 से आज तारखी तक कुल 96 माह की कुल भरण-पोषण राशि 3 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से 2 लाख 88 हजार एकमुश्त वसूल कर दिलाई जाए. अभी तक जावेद खान की गिर तारी हुई है और न ही मुझे मेरे भरण-पोषण की राशि प्राप्त हुई है. इसके पूर्व में भी कुटु ब न्यायालय ने कुर्की वारंट आदेशित किया गया था. अभी तक थाना प्रभारी चांदामेटा द्वारा लगातार वारंट पर तामीली नहीं कराया गया है. उसने कलेक्टर से गुहार लगाई है कि जावेद खान को अग्रिम पेशी 07 जनवरी 2026 से पूर्व जेल भिजवाने एवं आवेदिका को भरण-पोषण राशि दिलवाने की कृपा करें
