विद्यालयों में नहीं बंटी किताबें कबाड़े में पड़ीं

बुधनी। शिक्षण सत्र अंतिम दौर में चल रहा है, लेकिन अब तक कई स्कूलों में किताबों का वितरण नहीं हो सका. यह हम नहीं दशहरा मैदान के समीप सामुदायिक भवन के एक कमरे में लावारिस पड़े पुस्तकों का जखीर खुद बयां कर रहा है. हालांकि विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि यह पुस्तकें अतिरिक्त हैं. सभी स्कूलों में पुस्तकों का वितरण पूर्व में ही किया जा चुका है, लेकिन इन्हें लावारिस क्यों रखा गया है. इसका जवाब किसी जवाबदेह के पास नहीं था.

बच्चों की पढ़ाई अच्छी हो इसलिए इस बार स्कूल खुलने से पहले ही सरकारी स्कूलों में बच्चों को बांटने के लिए पुस्तकें भेज दी थीं. इन पुस्तकों को जिला स्तर से सभी बीआरसी स्तर भी भेज दिया गया था, लेकिन जिम्मेदारों ने अपनी जवाबदेही नहीं समझी. शिक्षा विभाग की ऐसी ही गंभीर लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. नगर के दशहरा मैदान स्थित सामुदायिक भवन में वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2025-26 की एनसीईआरटी की कक्षा 11वीं व 12वीं की पाठ्यपुस्तकें खुले में लावारिस हालत में पाई गईं. बड़ी संख्या में पड़ी इन किताबों पर धूल जम चुकी है और वे कचरे जैसी स्थिति में नजर आ रही हैं. जिससे शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

प्राप्त जानकारी के अनुसार यह पुस्तकें विद्यार्थियों को वितरित किए जाने के उद्देश्य से यहां रखी गई थीं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की लापरवाही के चलते न तो इन्हें सुरक्षित स्थान पर रखा गया और न ही समय पर वितरण किया गया. नतीजतन बहुमूल्य शैक्षणिक सामग्री खुले में खराब होती रही.

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब केंद्र और राज्य सरकार द्वारा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओÓ जैसे अभियानों के माध्यम से शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं. इसके विपरीत, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राएं आज भी पुस्तकों के अभाव में पढ़ाई करने को मजबूर हैं. अब देखना है कि इन पर क्या कार्रवाई होती है.

लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के नगर अध्यक्ष अभिषेक बरबे ने शिक्षा विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विभागीय लापरवाही से छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.एक ओर जहां कई विद्यालयों में विद्यार्थियों को किताबें उपलब्ध नहीं हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी किताबें खुले में पड़ी बर्बाद हो रही हैं.यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के प्रति घोर उदासीनता को भी दर्शाता है. उन्होंने शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने एवं पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनकाकहना है कि यह स्पष्ट किया जाए कि पुस्तकों की सुरक्षा और वितरण की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी.

जुलाई में कलेक्टर ने जारी किए थे चेतावनी पत्र

जिले के सरकारी स्कूलों में पुस्तकों के वितरण की स्थिति को कलेक्टर बालागुरू के ने भी संतोषजनक नहीं माना था. उन्होंने सभी जिम्मेदारों को अंतिम चेतावनी पत्र देकर 25 जुलाई से पहले किताबों के वितरण के निर्देश देते हुए इसका प्रमाणीकरण भी कार्यालय में प्रस्तुत करने को कहा गया था, लेकिन कलेक्टर के निर्देशों पर भी जिम्मेदारों ने अमल करना जरूरी नहीं समझा.

कमरे में तालाबंद कर रखी थी किताबें

बुधनी विकासखंड में एनसीईआरटी की किताबों का वितरण किया जा चुका था तथा उसके बाद बची अतिरिक्त किताबें ताले में बंद कर व्यवस्थित रूप से रखी गई थीं. कमरे का ताला कैसे टूटा, इसकी जानकारी विभाग को नहीं थी. मीडिया के माध्यम से मामला संज्ञान में आने के बाद सभी किताबें मंगवाकर कार्यालय में सुरक्षित रखवाई जा रही हैं.

शशि सिंह,
ब्लॉक शिक्षा अधिकारी

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