चिटलर अमित खम्परिया को ठगी मामले में कोतवाली पुलिस ने रिमांड पर लिया

जबलपुर: करोड़ों की धोखाधड़ी के प्रकरणों में लंबे समय से फरार चल रहे चिटलर ईनामी आरोपी अमित खम्परिया को पुलिस ने नागपुर से गिरफ्तार करने के बाद संजीवनी नगर पुलिस ने 15 दिसंबर तक रिमांड पर लिया था रिमांड खत्म होने पर उसे जेल भेज दिया गया था वहीं कोतवाली पुलिस ने मंगलवार को प्रोटेक्शन वारंट पर दो दिन की डिमांड पर ले लिया। अमित ने कोतवाली थाना अंतर्गत अंधेरदेव निवासी रिटायर्ड फैक्ट्री कर्मचारी को टोल प्लाजा में डबल मुनाफे और पार्टनरशिप का लालच देकर 23 लाख रूपए की ठगी की थी। कोतवाली पुलिस ने शिकायत पर रविवार को धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी जिसमें अब उसकी गिरफ्तार दर्ज हुई है।

पुलिस के मुताबिक यदुवंश मिश्रा पिता स्व. बैजनाश प्रसाद मिश्रा 66 वर्ष निवासी अंधेरदेव ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वह व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर से सेवानिवृत्त कर्मचारी है। सेवानिवृत्ति के बाद से अँधेरदेव जबलपुर में स्थित हनुमान जी के मंदिर में पुजारी है। उसका परिचय अमित खम्परिया से लगभग 8 साल पुराना है। अमित खम्परिया ने बताया था कि उसके टोल प्लाजा के काम चलते है। 2-3 बार अमित खम्परिया ने उससे कहा कि आपके पास जो भी रूपया जमा है, हमारे साथ टोल प्लाजा में पार्टनरशिप कर लो तो बैंक से कई गुना ज्यादा लाभ मिलेगा, आपकी रकम दुगनी हो जाएगी तो उसने कहा था कि सेवानिवृत्ति की रकम बीस-पच्चीस लाख मात्र मिली थी

जो जीवन भर की जोडी हुई पूंजी है यदि नुकसान हुआ तो सब बर्बाद हो जाएगा तो अमित ने कहा कि हम लोगों के साथ पार्टनरशिप करने पर किसी को कोई नुकसान नहीं होता है। अमित खम्परिया उसे आनन-फानन में गाड़ी में बैठा कर कोआपरेटिव बैंक ले गया और बैंक से 1 अक्टूबर 2018 को तेरह लाख एनईएफटी से अमित खम्परिया के खाते में ट्रान्सफर कर दिये। दस लाख का चेक नगद निकाले जो अमित खम्परिया ने तत्काल अपने हाथ में ले लिये थे। 9 माह बाद अमित खम्परिया घर आया। कहने लगा कि आप 5 लाख रूपए और दो नही तो आपकी दी हुई रकम डूब जाएंगी क्योंकि टोल प्लाजा में घाटा लगा है डरके मारे दो लाख रूपये और ट्रान्सफर कर दिये थे।

एक साल बीत जाने के बाद अमित से अपनी दुगनी रकम वापिस मांगी तो उसने कहा कि पैसे एनएचएआई में फंसे हुए हैं 3-4 महींने बाद मिल पायेंगे। 3-4 महीने का समय व्यतीत होने के बाद भी अमित खम्परिया रूपये नहीं लौटा रहा था। 2 साल बाद मिन्नतें करने और पुलिस में शिकायत करने की बात कहने पर 3,00,000 रूपए नगद अमित खम्परिया ने दिए और कहा कि थोडे दिन और रुकना पड़ेगा। ऐसा करते-करते लगभग 3 साल हो गए तो अमित खम्परिया ने 20 लाख रूपए का चेक दिया। बैंक में चेक लगाया तो वह बाउंस हो गया। अमित की आपराधिक प्रवृत्ति का होने सें शिकायत करने से भी डरने लगा था। बाद मेें हिम्मत कर शिकायत की थी। जब अमित की नागपुर से गिरफ्तारी हुई तो कोतवाली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी।

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