शिल्पकारों की कला और वस्तुओं से सजा परी बाजार

भोपाल: गौहर महल में लगे परी बाजार की रंगत देखते बनी। शहर के अलग अलग हिस्सों से आए दर्शक बाजार में लगे उत्पादों का लुफ्त उठाते नजर आए। बाजार में इत्र की खुशबू से लेकर बच्चों के खिलौने, गोबर से बने अनूठे सजावट के सामान, खजूर के गुलदस्ते, प्लास्टिक के खिलौने सहित झाबुआ जिले की पारंपरिक गलसन माला और हाथों से बने कागजों वाली डायरी जैसे अनोखे,अतरंगी और मनभावक वस्तुएं दर्शकों को खूब पसंद आई।मेरे पास हैंडमेड डायरी, बैग्स, की चैन हैं इन सबको हाथों से बनाया है। डायरी के पेज भी हाथों से बनाए है। बैग जो हैं ये कपड़ों को रीसाइकिल करके बनाया गया है। इसके साथ ही अठराह चंगा ये एक गेम है, इसमें पॉकेट भी है। इसमें गोटियां रखकर इसे तय करके कही भी रख सकते हैं। सफर में भी साथ लेकर जा सकते हैं और खेल सकते हैं।
पूनम महतो, इटारसी
जैसी खुशबू चाहिए हो वैसी खुशबू तुरंत बनाकर तैयार कर देती हूं। बेस ऑयल में कई सारी अलग अलग फ्रैगनेंस को मिलाकर मैं परफ्यूम बनाती हूं। जो लोगों को खूब पसंद आता है। इसके अलावा कई लोग इत्र लेकर जाते हैं जो कि बेस ऑयल का ही वास्तविक स्वरूप होता है।
प्रीति माहेश्वरी, भोपाल
खजूर के पत्तों को छीलकर उनसे ये गुलदस्ते तैयार करते हैं। इसे बनाने में एक से दो दिन का समय लगता है। पूरी तरह हाथ की कारीगरी होती है। इसकी विशेषता ये है कि इसे कैसे भी रखो मोड़ो ये खराब नहीं होता और दिखने में एकदम अलग लगता है। मैने इसमें हनुमान जी का गदा, गुलदस्ता, मंदिर की झाड़ू, डिजाइनर झाड़ू और कई सारी चीजें तैयार की हैं।
सुधाकर खाडके, भोपाल
झाबुआ जिले की पारंपरिक माला है इसे गलसन माला कहते हैं। इसे हमारे परिवार के समूह द्वारा बनाया जाता है। सुई धागे के इस्तेमाल से एक एक मोटी को बड़ी बारीकी से पिरोते हैं। उसके बाद ये माला तैयार होती है। इसमें कई परतें होती हैं इसलिए इसे बनाने में समय लगता है।
नटवर धाकिया, झाबुआ
दूसरे दिन की प्रस्तुतियां
दिन की सबसे मनभावन प्रस्तुति दिल्ली की फौजिया दास्तांगो की राधाकृष्ण पर आधारित दास्तान रही। उन्होंने पहली बार उर्दू में राधाकृष्ण की कथा प्रस्तुत की। क्लासिकल गीतों, भजनों और सूफियाना तर्ज के मेल ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। श्रीकृष्ण जन्म, उनकी लीलाएं, गोपियों के खेल और राधा–कृष्ण का प्रेम, सब कुछ सुरों और शब्दों के साथ जीवंत हो उठा।
शाम होते ही कार्यक्रम मुशायरे में बदल गया। ऑल इंडिया मुशायरे में डॉ. अंजुम बाराबंकवी, बनत अजरा नकवी, अनस फैजी और विजय तिवारी जैसे मशहूर शायरों ने अपने एक से बढ़कर एक कलाम पेश किए। अनस फैजी और विजय तिवारी की रचनाओं ने समाज में महिलाओं की स्थिति पर गहरी चर्चा को जन्म दिया। शायरों की शेर–ओ–शायरी पर सभागार तालियों से गूंजता रहा।

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