ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे
“भरोसा रखना है तो ख़ुद पर रख, शक करने के लिए लोग हैं, कुछ करके दिखा दुनिया को, तालियां बजाने के लिए लोग हैं।” लगता है कि सूबे के छत्रप सिंधिया और ग्वालियर के सांसद भारतसिंह कुशवाह इसी फलसफे पर चल रहे हैं। ग्वालियर के विकास से जुड़े मसलों पर खुद को ज्यादा चिंतित और संवेदनशील साबित करने के लिए इन दोनों नेताओं के दरम्यान जिस कदर होड़ सी चल रही है और बैठक-बैठक का खेल सा चल रहा है, उसे देखकर अब जनमानस के बीच कहा जाने लगा है कि विकास के मसले पर अलग अलग ढपली बजाने के बजाए यदि दोनों वरिष्ठ नुमाइंदे संयुक्त रूप से प्रयास करें तो विकास के मामले में ग्वालियर के दामन पर लग रहे सूबे के अन्य शहरों के मुकाबले पिछड़ जाने की तोहमत हटने में देर नहीं लगेगी।
हालांकि सिंधिया की इसी तरह की स्पर्धा डेढ़ साल पहले तक ग्वालियर में विवेक शेजवलकर और गुना में केपी यादव के साथ भी चली थी, महल के कथित हस्तक्षेप के खिलाफ शिकवा शिकायतों का दौर खूब चला लेकिन इन दोनों तत्कालीन सांसदों ने सिंधिया के बड़े राजनीतिक कद को भांपते हुए उन्हें सीधी चुनौती देने के बजाए साइड लाइन अपनाना ज्यादा वाजिब समझा। लेकिन सिंधिया के गृहनगर से चुने गए मौजूदा सांसद भारतसिंह के तेवर कुछ और ही बयां कर रहे हैं। ग्वालियर में चल रहे तमाम प्रोजेक्ट्स और भविष्य की स्कीमों को लेकर भारतसिंह कलेक्ट्रेट में ताबड़तोड़ बैठकें करने में जुटे हैं और इसके जवाब में सिंधिया द्वारा भी ऐसी ही बैठकें ली जा रही हैं।
शहर विकास से मुतालिक विषयों पर समन्वित प्रयास करने के बजाए एकला चलो के इस राग की शुरुआत किस तरफ से पहले हुई, इसका जवाब न सीधा है और न आसान है लेकिन इतना अवश्य है कि एक ही दल के दोनों नेताओं द्वारा अलग अलग की जा रही बैठकों के एजेंडा के बिन्दु एक ही रहते हैं, मसलन…चंबल पेयजल परियोजना, रेलवे स्टेशन जीर्णोद्धार कार्य, सड़कों का नवनिर्माण, एलीवेटेड रोड आदि। एक नेता द्वारा ली गई बैठक के जवाब में दूसरे नेता द्वारा ली जाने वाली बैठक में भी इन योजनाओं की न सिर्फ समीक्षा की जाती है बल्कि अधिकारियों को वही दिशा-निर्देश दिए जाते हैं जो विगत बैठक में दिए गए थे।
अभी इसी इतवार के रोज सांसद भारतसिंह ने कलेक्ट्रेट में अफसरों और नेताओं की बैठक बुलाई थी तो आज बुधवार को सिंधिया ने भी इन्ही विषयों पर बैठक बुलाई। इस समय संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है लेकिन सिंधिया खास तौर पर यही बैठक लेने ग्वालियर तशरीफ लाए। भारत सिंह खुले तौर पर विधानसभा स्पीकर नरेन्द्र सिंह के कट्टर समर्थक हैं, कहा तो यही जाता है कि ग्वालियर सांसद को सिंधिया केनरेन्द्र सिंह के कैम्पस से ही ऊर्जा मिल रही है। इन बैठकों के बहाने ग्वालियर की भाजपाई सियासत में साफ तौर पर दो विभाजन रेखाएं बन गई हैं। सिंधिया द्वारा बुलाई बैठक में नरेंद्र सिंह खेमे के जनप्रतिनिधि नहीं जाते तो भारत सिंह की बैठकों में सिंधिया खेमे के नेता जाना जरूरी नहीं समझते।
मुरैना की कार्यकारिणी में नरेन्द्र सिंह का दबदबा, बाकी को ज्यादा नहीं
इंतजार खत्म हुआ और चंबल संभाग के सबसे बड़े जिले मुरैना में भाजपा ने अपनी जिला कार्यकारिणी घोषित कर दी, किस नेता के कितने समर्थकों को नई कार्यकारिणी में जगह मिली, इसी का आंकलन और गुणाभाग कर स्थानीय क्षत्रपों की वजनदारी को राजनीतिक वीथिकाओं में फिर से आंका जा रहा है। फिलवक्त मुरैना में सत्तारूढ़ दल में गर्माहट महसूस की जा सकती है। कार्यकारिणी देख कहा जा सकता है कि तोमर समर्थक बढ़त में रहे। नई कार्यकारिणी में शामिल 27 में से 15 पदाधिकारी विधानसभा स्पीकर नरेंद्र सिंह खेमे से हैं। वहीं सिंधिया खेमे के 2 लोगों को टीम में जगह मिली है।
कई बड़े नामों की छुट्टी होने से पार्टी में अंदरूनी नाराजगी महसूस की जा सकती है। जिला कार्यकारिणी में पूर्व प्रदेशाध्यक्ष बीडी शर्मा खेमे को खास तबज्जो नहीं मिली। अब ग्वालियर की जिला कार्यकारिणी का इंतजार किया जा रहा है। चर्चा है कि ग्वालियर के अध्यक्ष राजौरिया से प्रदेश नेतृत्व ने सिर्फ पांच छह नाम देने को कहा है, पार्टी सूत्रों के अनुसार बाकी नाम भोपाल से तय होकर आ जाएंगे। सूबा सदर खंडेलवाल अभी एक मंत्री के परिवार में आयोजित शादी समारोह में शरीक होने आए तो उन्होंने स्थानीय नेताओं से संभावित नामों पर चर्चा की है।
अमित शाह आ रहे हैं, मैराथन तैयारी
अमित शाह ग्वालियर आ रहे हैं, हालांकि दौरा कार्यक्रम अभी आधिकारिक तौर पर फाइनल नहीं हुआ है लेकिन दिल्ली से संकेत मिलते ही प्रशासन तैयारी में जुट गया है। जिला प्रशासन एवं नगर निगम के अफसरान तैयारी बैठकों में जुटे हैं। शाह आएंगे तो सूबे के वजीर ए आला का आना भी तय है। ऊपर से हुक्म है कि तैयारियों में कोताही न बरती जाए।
