
ग्वालियर । आईटीएम ग्वालियर के यांत्रिकी इंजीनियरिंग विभाग द्वारा ‘डिफेंस टेक्नोलॉजी एंड फ्यूचर वारफेयर‘ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें देश की रक्षा प्रणाली में तकनीक की बदलती भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में लेफ्टिनेंट कर्नल अमन सिंह शामिल हुए। इस अवसर पर आईटीएम ग्वालियर की डायरेक्टर डाॅ. मीनाक्षी मजूमदार, डीन रिसर्च डाॅ. दीपेश भारद्वाज, डीन एडमिनिस्ट्रेशन डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव, डीन एकेडमिक डाॅ. एसएस चौहान, वूमेन इंपावरमेंट सेल की काॅर्डिनेटर डाॅ. मेघा लहाने, यूएचवी सेल काॅर्डिनेटर अमित जैन, गगन मुदगल, डाॅ. शाहिद अमीन, आशीष चंदेल, आकाश शुक्ला सहित विभिन्न प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
आईटीएम ग्वालियर के यांत्रिकी इंजीनियरिंग विभाग द्वारा ‘डिफेंस टेक्नोलॉजी एंड फ्यूचर वारफेयर‘ विषय पर आयोजित संगोष्ठी की औपचारिक शुरूआत डीन एकेडमिक डाॅ. एसएस चौहान ने स्वागत भाषण के साथ की। मुख्य वक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल अमन सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। अब युद्ध शक्ति कोड, एल्गोरिद्म, सेंसर, डेटा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित है। उन्होंने कहा कि आज युद्ध का मैदान केवल सैनिकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कोड, एल्गोरिद्म और सेंसर आधुनिक युद्ध की शक्ति बन गए हैं। उन्होंने कहा कि आज का युद्ध गोली से नहीं बल्कि एक क्लिक से शुरू होता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भविष्य की रक्षा प्रणाली तकनीक आधारित होगी। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, साइबर वॉरफेयर, स्वार्म ड्रोन, रोबोटिक्स, स्पेस एवं सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, फ्यूचर सोल्जर सिस्टम तथा क्वांटम कम्युनिकेशन जैसी उन्नत तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय रक्षा क्षेत्र तेज़ी से आधुनिक हो रहा है और दुनिया के सबसे बड़े रक्षा नवाचार केंद्र के रूप में उभरने की क्षमता रखता है।
