
जबलपुर। हाई कोर्ट ने आपराधिक प्रकरण की सुनवाई के दौरान अनूपपुर के अतिरिक्त लोक अभियोजक के खिलाफ कार्यवाही के आदेश जारी किये थे। विधि एव विधायी विभाग ने हाईकोर्ट से दोषी अतिरिक्त लोक अभियोजक के खिलाफ एक्शन लेने के संबंध में अभिमत मांगा था। हाईकोर्ट ने विभाग के इस रवैये को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी को तलब किया था। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस राम कुमार चौबे की युगलपीठ के समक्ष विधि एव विधायी विभाग के अंडर सेक्रेटरी आर के सिंह व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए और कृत्य के लिए बिना शर्त माफी मांगी। युगलपीठ ने अंडर सेक्रेटरी को आदेश दिया कि शाम तक लिखित रूप में माफीनामा पेश करें, नहीं तो उसके खिलाफ एक्शन लिया जायेगा।
गौरतलब है कि हत्या के अपराध में अनूपपुर जिला न्यायालय के द्वारा आजीवन कारावास सजा से दंडित किये जाने के खिलाफ निर्मल कुमार झा ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील की सुनवाई के दौरान उसकी तरफ से तर्क किया गया था कि प्रकरण में दो अभियोजन साक्षी के धारा 161 के तहत दिये गये बयान रिकॉर्ड में मौजूद हैं। अतिरिक्त लोक अभियोजन ने प्रकरण की सुनवाई के दौरान दोनों अभियोजन साक्षी से एग्ज़ामिनेशन इन चीफ किया था और उनसे धारा 161 के तहत दर्ज बयानों के संबंध में कुछ नहीं पूछा था। जिससे पहली नज़र यह पता चलता है कि अतिरिक्त लोक अभियोजक ने अपनी ईमानदारी से समझौता किया है। हाईाकोर्ट ने अतिरिक्त लोक अभियोजन के खिलाफ जांच कर तीन सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किये थे।
पिछली सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता की तरफ से युगलपीठ को बताया गया कि विधि व विधायका विभाग के एक अनजान व्यक्ति ने उनसे दोषी व्यक्ति के खिलाफ कार्यवाही के संबंध में हाईकोर्ट से इंस्ट्रशन प्राप्त करने कहा है। युगलपीठ ने इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य का विधि व विधायी विभाग के व्यक्ति को इस बात की जानकारी नहीं है कि क्या एक्शन लिया जाना है। यह अपना बोझ कोर्ट के कंधे में डालने की कोशिश है। जिस व्यक्ति ने सरकारी अधिवक्ता से ऐसा कहा है उसका नाम न्यायालय के समक्ष अगली सुनवाई के दौरान पेश किया जाये। इसके अलावा विधि विभाग के संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे।
अपील पर बुधवार को हुुई सुनवाई के दौरान विधि एवं विधायी विभाग के अंडर सेक्रेटरी युगलपीठ के समक्ष उपस्थित हुए। उनकी तरफ से हाईकोर्ट में लिखित अंडरटेकिंग दी गयी कि विभाग को हाईकोर्ट से एक्शन के संबंध में इंस्ट्रशन प्राप्त करने का अधिकार नहीं है। विधि विभाग राष्ट्रपति व गवर्नर नहीं है जो हाईकोर्ट के निर्देश देने का अधिकार रखता है। सरकारी अधिवक्ता तथा अंडर सेक्रेटरी ने बिना शर्त हाईकोर्ट से माफी मांगी।
