इंदौर: जहां एक ओर नगर निगम विकास के कार्य करता है, वहीं दूसरी ओर कुछ अधिकारी और कर्मचारी नियमों की अनदेखी कर या रिश्वत लेकर अतिक्रमण को बढ़ावा देते हैं, जिससे विकास कार्यों में बाधा आती है और जनता को परेशानी होती है. यह एक आम समस्या है, जिस पर सरकार और प्रशासन भी मौन रहते हैं.
इसी तरह का अवैध अतिक्रमण का एक मामला मालवा मिल क्षेत्र से सामने आया है.
मालवा मिल से पाटनीपुरा जाने वाले मार्ग पर एक वर्षों पुरानी और संकरी पुलिया को इसलिए तोडक¸र नई और चौड़ी बनाई गई, ताकि आम जन और वाहन चालकों को सुविधा मिल सकें. इस पुलिया के निर्माण में जो लाखों रुपया खर्च हुआ, वह तो जनता का ही है, साथ ही पुलिया निर्माण के समय एक वाहन चलक की दुर्घटना से मृत्यु भी हो चुकी है, तब जाकर यह पुलिया बनी है.
अब इस पर नो-पार्किंग और व्यापार न करने जैसे कड़े नियम भी हैं, लेकिन पुलिसकर्मी और निगमकर्मी नियम की आड़ में अपनी जेब गर्म कर सरकारी संपत्ति पर अवैध अतिक्रमण करवा रहे हैं. पुलिया पर कुछ चार पहिया वाहन पार्किंग होते है ंऔर तो और सब्जी वाले हाथ ठेला लिए पुलिया के आधे हिस्से की सडक¸ के बीच खड़े होकर सब्जी बेचते रहते हैं और यह सब होता है सरकारी जिम्मेदार कर्मचारियों के सामने. लोगों का कहना है कि दिन भर के 100-50 रुपए के लालच में कर्मचारी इन पथ विक्रेताओं को अतिक्रमण की इजाजत दे देते हैं, जनता परेशान होते रहती है.
इनका कहना है
शहर में देखने में आया है कि जहां सडक¸ चौड़ीकरण के बाद वहां पथ विक्रेताओं का कब्जा हो जाता है, उसी तरह मालवा मिल पुलिया पर भी कब्जा हो चुका है.
– राहुल चौहान
सडक¸ चौड़ी इसलिए की जाती है, ताकि यातायात सुगम हो, लेकिन हर जगह अतिक्रमण की बीमारी है. इतनी सख्ती होने के बावजूद फुटपाथ तो दूर सडक¸ पर ही अतिक्रमण की हिम्मत कैसे होती है.
– संतोष सोनोने
आज शहर का यातायात विस्फोटक स्थिति में है. हर तरफ लोग जाम से जूझते दिखाई देते हैं. मालवा मिल क्षेत्र का तो और भी बुरा हाल है. अतिक्रमण के कारण चलने के लिए सडक¸ें छोटी पड़ रही हैं.
– अनिल बेंडवाल
