ब्यावरा: बेसहारा गौवंश को आश्रय मिल सके इस उद्देश्य से शासन द्वारा जिले में दो स्थानों पर दस हजार गौवंश को रखने हेतु दो स्वावलंबी गौशाला के लिए शासन ने गौशाला के लिए भूमि का आवंटन कर दिया गया है.जानकारी के अनुसार ब्यावरा तहसील के तालोडी गांव के समीप 57.7550 हेक्टेयर क्षेत्र में नजूल की भूमि को गौशाला हेतु हस्तांतरित किया है. वहीं सारंगपुर तहसील के ग्राम कडलावद में 50.1320 हेक्टयर भूमि गौशाला के लिए हस्तांरित की है.स्व सहायता समूह करेंगे संचालन स्वावलंबी गौशाला का निर्माण शासन के द्वारा किया जाएगा. इनके संचालन का जिम्मा अनुबंध के आधार पर किसी स्व सहायता समूह को दिया जाएगा. जिसके द्वारा गौशाला का संचालन किया जाएगा. शासन द्वारा गौशाला में रखे जाने वाले मवेशी, पंजीयन के आधार पर निर्धारित अनुदान की राशि प्रदान की जाएगी.
एनजीओ ही करेगा समुचित देखरेख
स्वावलंबी गौशाला के लिए शासन द्वारा मात्र अनुदान राशि दी जाएगी जबकि गौशाला का समुचित संचालन संबंधित एनजीओ के द्वारा ही किया जाएगा. मवेशियों के लिए चारा, पानी आदि अन्य व्यवस्थाएं एनजीओ के द्वारा ही की जाएगी.आय का साधन जुटा सकेंगे समूह गौशाला का संचालन करने वाले स्व सहायता समूह को ही गौशाला का संचालन करना होगा. इसके लिए वह गौशाला में गोबर आदि से विभिन्न प्रकार की सामग्री तैयार कर उसका विक्रय कर आय का साधन जुटा सकेंगे. गौशाला में बर्मी कम्पोज के साथ केंचुआ खाद का निर्माण, गोबर से कंडे, ईट, दीपक आदि वस्तुओं का निर्माण कर सकेंगे.
बेसहारा गौवंश को मिल सकेगा आश्रय जिले में दो विशाल स्वावलंबी गौशालाओं के निर्माण एवं संचालन से बेसहारा गौवंश को आश्रय मिल सकेगा. एक गौशाला में लगभग पांच हजार गौवंश रह सकेंगे. इस तरह बेसहारा गौवंश को काफी कुछ राहत मिल सकेगी.जिले में हजारों की संख्या में बेसहारा गौवंश विगत माह पूर्व ही गौवंश की गणना का कार्य हुआ है. जिले में डेढ़ लाख से अधिक की संख्या में बेसहारा गौवंश है, इनमें अधिकांशतः गौवंश हाइवे, स्टेट हाइवे, चौराहों, सडक़ो पर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है.
