मुंबई,11 मार्च (वार्ता) अभिनेत्री प्रियंवदा कांत ने एण्डटीवी के सुपरनैचुरल हॉरर कॉमेडी शो ‘घरवाली पेड़वाली‘ में कई स्टंट खुद किये। अभिनेत्री प्रियंवदा कांत एण्डटीवी के सुपरनैचुरल हॉरर कॉमेडी शो ‘घरवाली पेड़वाली‘ में लतिका का किरदार निभा रही हैं। हाल ही में आने वाले एक रोमांचक ट्रैक की शूटिंग के दौरान उन्होंने अपने अभिनय की सीमाओं को और आगे बढ़ाया। इस दौरान, उन्होंने कई स्टंट खुद किए, जिनमें एक मुश्किल सीन ऐसा भी था, जिसमें उन्हें लंबे समय तक हार्नेस के सहारे उल्टा लटकना पड़ा। जो शुरुआत में थोड़ा डरावना लग रहा था, वही अनुभव बाद में उनके लिए रोमांचक और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला बन गया।
अपने अनुभव को साझा करते हुए प्रियंवदा कांत ने कहा, शो में मैं कई स्टंट कर चुकी हूँ। लगभग हर हफ्ते कोई न कोई नया स्टंट करना होता है। कुछ तो इतने अनोखे और चुनौतीपूर्ण होते हैं कि उन्हें करना आसान नहीं होता। ऐसा ही एक स्टंट था, जिसमें मुझे चमगादड़ की तरह उल्टा लटकना था। यह बहुत मुश्किल था, क्योंकि काफी देर तक उल्टा लटकने से सारा खून सिर की तरफ दौड़ जाता है और उसी दौरान आपको अपने डायलॉग भी बोलने होते हैं। जब पहली बार इस सीन के बारे में सुना, तो मैं उत्साहित भी थी और थोड़ी घबराई हुई भी, क्योंकि यह ऐसा अनुभव नहीं है, जिसकी आदत तुरंत पड़ जाए। शुरुआती रिहर्सल में शरीर को संतुलन और दबाव के साथ तालमेल बिठाने में समय लगा, लेकिन मैंने ठान लिया था कि यह स्टंट मैं खुद ही करूँगी, क्योंकि इससे सीन ज्यादा वास्तविक लगता है।
प्रियंवदा कांत ने कहा, “मेरे किरदार लतिका के लिए मुझे बहुत लंबा विग पहनना पड़ता है। जब मैं उल्टा लटकती थी, तो वह बार-बार सिर को खींचता और बालों पर दबाव डालता था। स्क्रीन पर यह सीन मजेदार लगता है, लेकिन इसे करने में काफी मेहनत लगती है। हमारी सुरक्षा टीम और स्टंट टीम हमेशा साथ रहती है, जो हर उपकरण को दोबारा जाँचती है और हमें सही पोस्टर और साँस लेने की तकनीक भी बताती है। फिर भी कई बार ऐसे स्टंट काफी थकाने वाले और दर्दनाक हो सकते हैं। एक और मजेदार लेकिन मुश्किल स्टंट वह था, जब मुझे पंखे पर बैठना पड़ा। मैं सचमुच पंखे पर बैठी थी और वह लगातार घूम रहा था, जिससे मुझे काफी चक्कर आने लगे। देखने में यह सीन बहुत मजेदार लगता है, लेकिन उस घूमते हुए पंखे पर संतुलन बनाए रखना काफी मुश्किल था। ऐसे समय में मेरे सह-कलाकार हमेशा मेरा हौंसला बढ़ाते हैं। वे बार-बार पूछते रहते हैं कि मैं ठीक हूँ या नहीं और मुझे यह कहते हुए प्रोत्साहित करते रहते हैं कि ‘ओ माय गॉड, तुम सच में एक बहादुर लड़की हो, वाकई बहुत अच्छा कर रही हो।‘ इस तरह के प्रोत्साहन से वाकई मदद मिलती है, जब आप शारीरिक रूप से कुछ ऐसे चुनौतीपूर्ण काम कर रहे हों।”

