खुदीराम बोस की गाथा को नए अंदाज में पेश करेगी फिल्म रे इंकलाबी

भोपाल: स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी और सबसे कम उम्र के क्रांतिकारियों में शामिल खुदीराम बोस के अदम्य साहस को बड़े उतारने की तैयारी है. इस फिल्म को फिल्म रे इंकलाबी के माध्यम से परदे पर उतरा जायेगा। फिल्मकार डॉ सुधीर आजाद द्वारा निर्मित यह शॉर्ट फिल्म खुदीराम बोस की 136 वीं जयंती पर उन्हें समर्पित सिनेमाई श्रद्धांजलि है। वीनस फिल्म प्रोडक्शन के बैनर तले बनी इस फिल्म के निर्माता नवीन सिंह हैं। फिल्म का टीजर वीर बाल दिवस पर 26 दिसंबर को भोपाल में जारी किया जाएगा।
फिल्म की कथा का केंद्र वह दौर है, जब मुजफ्फरपुर बम कांड के बाद 18 वर्ष के युवा खुदीराम बोस को ब्रिटिश शासन ने फांसी की सजा सुनाई थी। इस निर्णायक अध्याय को फिल्म में अत्यंत संवेदनशील और प्रभावशाली ढंग से पेश किया गया है। अदालत में चलती तीखी बहस दोष सिद्ध होने की प्रक्रिया और फैसले से ठीक पहले की बेचैन कर देने वाली घड़ियों को फिल्म बेहद तीव्र भावनात्मक शक्ति के साथ उकेरती है। सबसे प्रभावशाली दृश्य वह है.

जब एक युवा क्रांतिकारी निर्भीक होकर अंग्रेजी हुकूमत के सामने अपने विचारों को दृढ़ता से रखता है। यह प्रस्तुति खुदीराम के साहस और वैचारिक स्पष्टता को नई पीढ़ी के सामने सजीव कर देती है। फिल्म भोपाल के युवा कलाकार दक्ष जोशी द्वारा निभाए गए मुख्य किरदार के कारण और प्रभावी बनती है। उनकी अभिव्यक्ति संवाद अदायगी और क्रांतिकारी जोश फिल्म की प्रमुख शक्ति के रूप में उभरते हैं।

फिल्म की कहानी डॉ सुधीर आजाद की साहित्य अकादमी से सम्मानित पुस्तक मैं खुदीराम त्रैलोक्यनाथ बोस पर आधारित है जिसमें अदालत की मूल कार्यवाही दुर्लभ ऐतिहासिक संदर्भ और खुदीराम के वैचारिक वक्तव्य शामिल हैं।फिल्म के निर्माता नवीन सिंह का कहना है कि उनकी कोशिश है, कि खुदीराम बोस की गाथा केवल इतिहास की पुस्तकों में सीमित न रह जाए, बल्कि युवा पीढ़ी उसे नई दृष्टि से समझ सके। डॉ आजाद के अनुसार यह फिल्म केवल अतीत का चित्रण नहीं बल्कि वर्तमान पीढ़ी के भीतर राष्ट्रभाव और जागृति को मजबूत करने का प्रयास है।

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