
छिंदवाड़ा। अभी तक जिले में खाद की काला बाजारी और रसूकदारों को ज्यादा खाद देने के मामले सामने आते रहे है। इस बार खाद का अजीबों गरीब मामला सामने आया है। जहां बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित शिकारपुर सोसायटी से खरीदी गई एनपीके खाद की 50.129 किलो बोरियों में 5 से 12 किलो तक कम निकल रही है। जहां किसानों ने प्रबंधन पर कम खाद निकलने को लेकर आरोप प्रत्यारोप लगाए है। जहां शिकारपुर निवासी भगतराम माहोरे ने नवभारत से बातचीत में बताया कि दो दिन पूर्व सोसायटी से 24 बोरी खाद खरीदकर घर लेकर आया। जब एनपीके खाद की बोरी देखी तो उसमें ऐसा लगा वजन कम है। इसके बाद शक होने पर तराजू में एनपीके खाद का वजन किया। जिसमें एक बोरी में पाचं किलो, दूसरी बोरी में सात किलो और तीसरी बोरी में आठ किलो खाद कम निकली। वही तुकाराम माहोरे ने बताया कि मैं जो बोरी लाया था, उसमें 12 किलो कम निकली है। इस तरह दो किसानों के यहां इस तरह का मामला सामने आया है। किसानों का साफ कहना है कि प्रबंधक ने एनपीके बोरी खोलकर खाद निकाली है। आधा एक किलो खाद कम होने पर मान सकते है कि उठाने रखने में कम हो सकती है। इतनी ज्यादा मात्रा में खाद कम होना कहीं न कहीं प्रबंधन पर संवालिया निशान लगा रहा है।
बोरियों में सिलाई अलग अलग
किसानों ने आरोप लगाया है कि वहां भीड़ अधिक होने के कारण खाद गाड़ी में भरकर घर लेकर आ गए। जब खेत में खाद डालने के लिए निकाली, तो बोरी का वजन कम लगा। वजन करने पर कम निकली। जब उसकी सिलाई देखी तो कंपनी की डबल सिलाई खुली हुई थी, जो हरे रंग के तांत की थी। इन बोरियों में लाल तांत की सिंग्गल सिलाई थी। इससे स्पष्ट होता है कि यह पूरा खेल प्रबंधन ने ही किया है।
सीएम हेल्प लाइन में की शिकायत
किसान संतोष माहोरे ने एनपीके खाद की बोरियों से 5 से 12 किलो खाद निकलने के मामले में सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की है। शिकायत के बाद भोपाल से जांच के आदेश दिए गए है। जिसके बाद मौके पर मोहखेड़ से जांच दल पहुंचा है। जिसने इस शिकायत की जांच की है।
प्रबंधन ने कहा सोसायटी से पैक बोर दी…
इस मामले में सोसायटी प्रबंधन ने साफ तौर पर कहा है कि हमारी सोसायटी से कंपनी से जो एनपीके पैकिंग आई थी। वही बोरिया हमने दी है। तकरीबन 800 बोरिया मिली थी। जो दर्जनों किसानों को दी गई है। शिकायत सिर्फ एक दो किसान ही कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि यह जानबूझकर किया जा रहा है। रही बात सिलाई कि तो हमारी सिलाई हरे रंग के धागे की है। उनके पास जो बोरियों है, उनमें लाल रंग का धागा है। जो कंपनी का नहीं है। इनके पास यह बोरिया कहां से और कैसे आई, यह हम नहीं कह सकते।
इनका कहना है…
शिकायत के बाद जांच दल सोसायटी भेजा गया था। जांच दल उन बोरियों का से पल लेकर आया है। से पल की जांच करवाई जा रही है। सोसायटी में 800 बोरियां वितरित की गई है। कहीं से कोई शिकायत नहीं आई है। यह महज एक किसान की शिकायत है। जिसकी जांच की जा रही है। जांच के बाद इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।
डीएस घाघरे, मोहखेड़ ब्लाक कृषि अधिकारी
