जुगनी बाघिन के दुर्लभ दर्शन से उत्साहित हुए स्वयंसेवक

सिवनी। मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिज़र्व में इस वर्ष आयोजित अखिल भारतीय बाघ गणना (All India Tiger Estimation) का प्रथम चरण 1 से 7 दिसंबर तक चल रहा है। लगभग 400 आवेदनों में से चयनित 22 स्वयंसेवकों में इंदौर की वाइल्ड वारियर्स संस्था से जुड़े श्रीकांत कलमकर और स्वपनील फणसे भी शामिल हैं। दोनों को पेंच में लगातार तीसरी बार स्वयंसेवा का अवसर मिला है। श्रीकांत कलमकर ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर गुरुवार को अनुभव साझा करते हुए पेंच प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त किया।

स्वागत और प्रशिक्षणः पेंच के इतिहास-महत्व पर विस्तृत जानकारी और।खवासा पहुँचने पर वन प्रबंधक सुमित रेंगे ने स्वयंसेवकों का स्वागत किया और प्रोटोकॉल प्रशिक्षण दिया। इसके बाद पेंच टाइगर रिज़र्व के फील्ड डायरेक्टर रजनीश सिंह ने बाघ सर्वे के इतिहास, महत्व और पेंच की वैश्विक पहचान पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया किजंगल बुक के काला पहाड़,वेनगंगा,और बघीरा

का उल्लेख भी पेंच से ही जुड़ा है-जो इसे विश्वस्तरीय पहचान प्रदान करता है। उन्होंने स्थानीय समुदायों को संरक्षण से जोड़ने के प्रयासों को पेंच की सबसे बड़ी ताकत बताया।

सर्वे प्रक्रिया का प्रशिक्षण और कैंपों की ओर प्रस्था सर्वे की तकनीकी प्रक्रिया का प्रशिक्षण संजय नामदेव सर्व की तकनीकी प्रक्रिया का प्रशिक्षण संजय नामदेव द्वारा दिया गया, जिसके बाद सभी स्वयंसेवकों को विभिन्न कैंपों की ओर रवाना किया गया। श्रीकांत कलमकर तेलिया बीट, खवासा रेंज पहुँचे। यहाँ उनकी टीम में शामिल थेःजिसमे बीट गार्ड: कैलाश शरणागत वनकर्मीः अर्जुन वनकर्मीः नंदलाल

दैनिक 5-6 किमी वॉक- स्पष्ट संकेत कि पेंच का जंगल अत्यंत स्वस्थ

दूसरे, तीसरे और चौथे दिन टीम ने रोज सुबह 6:30 बजे से 5-6 किलोमीटर की वॉक कर क्षेत्र में बाघों के ताज़ा साइन दर्ज किए: पैरों के निशान खरोंच मल-मूत्र

पेड़ों पर पंजों के ताज़ा मार्क

इन सभी संकेतों से स्पष्ट हुआ कि तेलिया बीट का जंगल अत्यंत स्वस्थ, समृद्ध और जैव-विविधता से परिपूर्ण है। यहाँ तितलियाँ, अनेक पक्षी, सरीसृप, हिरण-सांभर और अन्य प्रजातियों की प्रचुर उपस्थिति मिली।

तीसरे दिन ‘जुगनी’ बाघिन के दुर्लभ दर्शन

अखिल भारतीय बाघ गणना पेंच सर्वे का सबसे रोमांचक क्षण तीसरे दिन आया जब टीम को पेंच की लोकप्रिय और प्रभावशाली बाघिन ‘जुगनी’ के दर्शन हुए। हरे-भरे जंगल, कल-कल करती नदियाँ, पक्षियों के संगीत और शांत वातावरण के बीच जुगनी की उपस्थिति ने स्वयंसेवकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रीकांत कलमकर ने इसे प्रकृति प्रेमी के जीवन का अविस्मरणीय क्षण” बताया।

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