जबलपुर : हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने राज्य सरकार के सर्कुलर की संवैधानिक वैधता को चुनौती पर प्रमुख सचिव, जल संसाधन सहित अन्य नोटिस जारी की जवाब-तलब कर लिया है। मामला 35 वर्ष सेवा के बाद भी समयमान वेतनमान से वंचित डिप्लोमाधारकों सब इंजीनियरों की याचिका से संबंधित है। याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी प्रवीण वर्मा सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता प्रशांत अवस्थी, असीम त्रिवेदी, आनंद शुक्ला, विनीत टेहेनगुनिया, शुभम पाटकर व प्रशांत संधोनिया ने पक्ष रखा।
उन्हाेंने दलील दी कि याचिकाकर्ता जल संसाधन विभाग में उप अभियंता के पद पर कार्यरत रहे हैं और सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने 35 वर्ष से अधिक की सेवा पूर्ण की है और सभी ने तृतीय कालावधि वेतनमान का लाभ प्राप्त किया, किन्तु चतुर्थ कालावधि वेतनमान (अधीक्षण अभियंता के वेतनमान के समतुल्य) से उन्हें वंचित रखा गया। 14 अगस्त, 2023 के शासकीय परिपत्र के खंड-तीन के अधीन पदोन्नति नियमों (मध्य प्रदेश जल संसाधन विभाग राजपत्रित सेवा भर्ती नियम, 1968) में विनिर्दिष्ट स्नातक डिग्री की योग्यता पूर्ण न करने के कारण यह लाभ निरस्त किया गया।
इस आधार पर मुख्य अभियंता के आदेश में स्पष्टतः कहा गया कि डिप्लोमाधारक इंजीनियरों के लिए अधीक्षण अभियंता पद हेतु निर्धारित योग्यता स्नातक अनिवार्य है ।याचिकाकर्ताओं के अनुसार 14 अगस्त 2023 के सर्कुलर का खंड-तीन, जो पदोन्नति सम्बन्धी शैक्षणिक योग्यता को कालावधि वेतनमान से जोड़ता है, संविधान के अनुच्छेद 14 (समता का अधिकार) और अनुच्छेद 16 (सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता) का स्पष्ट उल्लंघन है।
