राष्ट्रीय शोध एवं विकास एजेंडा को आगे बढ़ाने की कुंजी है उद्योग और शिक्षा जगत के साथ साझेदारी : जितेंद्र सिंह

नयी दिल्ली, 05 दिसंबर (वार्ता) विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि उद्योग और शिक्षा जगत के साझेदारी राष्ट्रीय शोध एवं विकास एजेंडा को आगे बढ़ाने की कुंजी है।

श्री सिंह ने शुक्रवार को यहां ग्लोबल समिट ऑन इंडस्ट्री-एकेडेमिया पार्टनरशिप 2025 में “भारत को एक अनुसंधान एवं विकास के पावरहाउस के रूप में उभारना: साझेदारी बनाना, उत्कृष्टता को बढ़ावा देना” विषय पर यह बात कही। श्री सिंह ने उद्योग, शिक्षा जगत और सरकार के बीच गहरे तथा निरंतर सहयोग का आह्वान करते हुए कहा कि यदि भारत खुद को एक वैश्विक शाेध और नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहता है तो ऐसी साझेदारियां अब वैकल्पिक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक क्षेत्रों में भारत की विकास महत्वाकांक्षाओं के लिए साझा जिम्मेदारी और भागीदारी पर आधारित एक पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता है।

श्री सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष और परमाणु शोध जैसे क्षेत्रों में गैर-सरकारी भागीदारी को व्यापक बनाने के हालिया फैसले सहयोगी मॉडल में बढ़ते विश्वास को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि निजी संस्थाओं की भूमिका का विस्तार नवाचार-आधारित विकास को गति देने के लिए केंद्र में होगा। श्री सिंह ने वैश्विक शोध संरचनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को तेजी से अपनी रणनीतियों को उन अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ बेंचमार्क (मानदंड) करना चाहिए जो गैर-सरकारी स्रोतों पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं।

उन्होंने नेशनल रिसर्च फाउंडेशन और हाल ही में घोषित अनुसंधान वित्त पोषण तंत्र जैसी पहलों का हवाला देते हुए कहा कि ये नवाचार में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने और दीर्घकालिक अनुसंधान संबंधों का निर्माण करने के प्रयास हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि समय के साथ उद्योग जगत शोध , उत्पादन और राष्ट्रीय आर्थिक विकास में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में उभरेगा।

श्री सिंह ने इस आयोजन में सीआईआई इंडस्ट्री-एकेडेमिया विशेष प्रकार की साझेदारी 2025 जारी किया, और बाद में एक प्रदर्शनी का दौरा किया जिसमें स्टार्टअप्स, शोध संस्थानों और एकेडमिक निकायों द्वारा विकसित उत्पादों और टेक्नोलॉजी को दिखाया गया था।

उन्होंने कहा कि भारत के बदलते वैज्ञानिक परिदृश्य के लिए शोध संस्थानों, इंडस्ट्री, स्टार्टअप्स और सरकार के बीच लंबे समय की साझेदारी की ज़रूरत है।

 

 

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