प्रियंका सिंह। छतरपुर।मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित भीमकुंड आज भी अपने भीतर ऐसे रहस्य समेटे बैठा है, जिनका जवाब विज्ञान भी नहीं दे पाया है। चारों तरफ कठोर चट्टानों से घिरा यह जलकुंड बाहर से भले ही सामान्य दिखता हो, लेकिन इसकी गहराई, पानी का रंग और प्राकृतिक घटनाओं के प्रति इसकी प्रतिक्रिया इसे दुनिया के अनोखे स्थलों की सूची में शामिल करती है।
महाभारत काल का साक्षी
स्थानीय लोग मानते हैं कि यह कुंड महाभारत काल का साक्षी है। कथा के अनुसार, जब पांडव अज्ञातवास में थे और द्रौपदी अत्यधिक प्यास से व्याकुल हुई, तब भीम ने अपनी गदा से चट्टान पर प्रहार किया और यहां जलधारा प्रकट हुई। आज भी कुंड के चारों तरफ मौजूद पुरानी संरचनाएं और गुफाओं जैसी आकृतियां इस लोककथा को और भी विश्वसनीय बनाती हैं।
भीमकुंड की सबसे आश्चर्यजनक बात है उसका नीला, क्रिस्टल जैसा साफ पानी, जिसकी गहराई दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए पहेली बनी हुई है। पानी की पारदर्शिता इतनी है कि आप सतह से कई फीट नीचे तक मछलियों को तैरते देख सकते हैं। बताया जाता है कि कई बार इसे खाली करने के प्रयास हुए, लेकिन पानी का स्तर कभी कम नहीं हुआ—मानो इसके भीतर कोई अदृश्य स्रोत निरंतर पानी दे रहा हो।
कई देशों की वैज्ञानिक टीमें लौटी खाली हाथ, गहराई 22 फीट बाद रहस्यमय–
2004 की सुनामी के दौरान जब समुद्र में भयावह हलचल थी, तभी भीमकुंड में अचानक 15 से 20 फीट तक जलस्तर उछलने लगा। यह घटना इतनी चौंकाने वाली थी कि विदेशी वैज्ञानिक टीमें यहां पहुंचीं। डिस्कवरी चैनल की टीम भी कई दिनों तक शोध करती रही, लेकिन 22 फीट से आगे कोई गोताखोर नहीं उतर पाया। अंदर पहुंचते ही तेज बहाव, भारी मछलियां और नीलम जैसी नीली चट्टानें रास्ता रोक लेती हैं। विशेषज्ञों का दावा है कि ऐसी मछलियां सामान्यतः समुद्र की गहराइयों में पाई जाती हैं, इसलिए यह कुंड किसी भूमिगत प्राकृतिक जलमार्ग से जुड़ा हो सकता है।
इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि जब भी दुनिया में किसी बड़े भूकंप या जलजाल (जलीय आपदा) की आशंका होती है, भीमकुंड का जलस्तर स्वतः बढ़ने लगता है। कई बार नेपाल, जापान व हिन्द महासागर में आए भूकंपों के पहले भी ऐसा देखा गया। यही वजह है कि स्थानीय लोग इसे प्राकृतिक आपदा का संकेतक भी मानते हैं।
