
इंदौर. आपसी और पारिवारिक विवादों को बिना कानूनी प्रक्रिया के सौहार्दपूर्ण तरीके से निपटाने की दिशा में इंदौर पुलिस कमिश्नरेट के सामुदायिक मध्यस्थता केंद्र ने एक बार फिर मिसाल पेश की है. बुधवार को हुई सुनवाई में 11 मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया, जिनमें 4 प्रकरणों में 24 लाख 65 हजार रुपए की राशि आवेदकों को दिलवाई.
सामान्य विवादों के तुरंत समाधान के उद्देश्य से शहर में संचालित सामुदायिक मध्यस्थता केंद्र पुलिस आयुक्त के निर्देशन में काम कर रहा है. छोटी-छोटी पारिवारिक समस्या, लेन-देन विवाद, पड़ोसी झगड़े और अन्य मामूली सिविल मामलों को आपसी समझौते के जरिये हल करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. हाल ही में पुलिस आयुक्त कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान प्राप्त आवेदनों को मध्यस्थता केंद्र को सौंपा था. जिसमें 31 आवेदनों पर सुनवाई करते हुए टीम ने 11 मामलों में आपसी समझौता करवाया, वहीं इनमें चार प्रकरण ऐसे थे, जिनमें 24 लाख 65 हजार रुपए की राशि आवेदकों को चेक के माध्यम से दिलवाई गई. सामुदायिक मध्यस्थता केंद्र की टीम प्रशिक्षित मध्यस्थों की मदद से पक्षकारों के बीच संवाद स्थापित कर समस्याओं के समाधान में सेतु का काम कर रही है. यह व्यवस्था बिना कानूनी प्रक्रिया के लोगों को तुरंत राहत देने में कारगर साबित हो रही है. इस केंद्र ने वर्ष 2024–25 में अब तक 48 प्रकरणों का निपटारा करते हुए 2 करोड़ 71 लाख 48 हजार 800 रुपए की राशि आवेदकों को वापस दिलवाई है. यह उपलब्धि पुलिस की पहल को आमजन के लिए बेहद लाभकारी बना रही है.
निपटाए गए प्रमुख मामलों में…
सचिन अग्रवाल, पलसीकर कॉलोनी,लेन-देन विवाद में मध्यस्थता टीम ने आवेदक को अनावेदक विजय कुमार जैसवानी से 21,57,055 रुपए चेक द्वारा दिलवाए. वहीं मेजेस्टिक नगर में रहने वाले अनीस खान को चंद्रशेखर मीणा से 2,85,000 रुपए चेक के माध्यम से भुगतान करवाया, साथ ही नंदबाग कॉलोनी में रहने वाले मनीष मोर्य को संगम महिला मंडल संबंधी विवाद में 18,000 रुपए दिलवाए गए. जबकि परदेशीपुरा में रहने वाली कल्पना को मां-बेटे के विवाद में मध्यस्थता कर पुत्र प्रवीण द्वारा मां को हर महीने 5000 रुपए भरण-पोषण देने की सहमति करवाई.
