चीन ने ताइवान के मामले पर फिर जापान से नाराजगी जतायी

बीजिंग, 03 दिसंबर (वार्ता) चीन ने ताइवान पर जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची के एक हालिया बयान पर एक बार फिर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा है कि जापान को अपने ऐतिहासिक अपराधों पर विचार करना चाहिए और अपने शब्दों को वापस लेना चाहिए।

ताइवान मामलों के राष्ट्रीय परिषद के प्रवक्ता झांग हान ने बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “जापान को चीन के आंतरिक मामलों में दखल देना बंद कर देना चाहिए। उसे मज़बूत कदम उठाते हुए अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धताओं और ‘अखंड-चीन’ सिद्धांत पर टिके रहना चाहिए।”

उल्लेखनीय है कि सुश्री तकाइची ने एक हालिया बयान में कहा था कि ताइवान के खिलाफ चीन की ‘नौसैनिक नाकाबंदी’ या कोई और कार्रवाई ‘जापान के लिये सैन्य कार्रवाई करने का उचित कारण’ हो सकती है। इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुश्री तकाइची राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता हासिल करने के लिये ऐसे बयान दे रही हैं।

दूसरी ओर, चीन ने लगातार जापान से अपनी ‘अखंडता का सम्मान’ करने का अनुरोध किया है। सुश्री हान ने यहां संवाददाताओं से कहा कि ताइवान पर सुश्री तकाइची का बयान चीन के अंदरूनी मामलों में दख़लंदाज़ी है। यह ताइवान के अलगाववादी समूहों को गलत संदेश देता है और ताइवान खाड़ी में शांति और स्थिरता के लिये खतरा है।

सुश्री हान ने जापानी हमले के खिलाफ चीनी ‘पीपल्स वॉर ऑफ़ रेजिस्टेंस’ की जीत और ताइवान के चीन में विलय की 80वीं सालगिरह को याद करते हुए कहा कि 1943 की काहिरा घोषणा सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से भी ताइवान पर चीन का अधिकार है।

उन्होंने कहा, “यह जापान का दायित्व है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इन दस्तावेज़ों के प्रावधानों को माने। ताइवान चीन का ही है। वह न कभी एक देश था और न कभी होगा। खाड़ी के दोनों ओर लोग चीनी ही हैं और ताइवान का भविष्य संयुक्त रूप से 1.4 अरब लोग मिलकर ही निर्धारित करेंगे।”

 

 

 

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