2.5 करोड़ खर्च कर चालू होगी कैथन डायवर्सन नहर

बहादुरपुर: जल संसाधन विभाग द्वारा ढाई करोड़ रुपये खर्च कर कैथन डायवर्सन की भूमिगत नहर को फिर से खोला जा रहा है। यह नहर बीते तीन वर्षों से बंद है। जिसे खोलने के लिए पहले भी दो बार प्रयास हो चुके हैं लेकिन ठेकदारों ने जब हाथ खड़े कर दिए तो विभाग ने बड़े स्तर पर कार्य योजना बनाई। जिसमें करीब ढाई करोड़ रुपए का खर्च आ रहा है। कार्य का टेंडर हो चुका है और कंपनी काम भी करने लगी है। उम्मीद है कि अगले एक साल के अंदर नहर दोबारा चालू हो जाएगी।दरअसल करीब पंद्रह वर्ष पहले क्षेत्र के खोपरा एवं हाजूखेड़ी गांव के बीच कैथन नदी को मोड़कर एक नहर में तब्दील किया गया था, जिससे 600 हेक्टेयर रकबा में सिंचाई होती थी।

इस योजना के तहत कैथन नदी पर एक बांध बनाया गया। जिसके पीछे करीब पांच किलोमीटर तक पानी जमा होता है। इस पानी को बांध के नजदीक से एक नहर में मोड़कर खेतों तक ले जाया गया था। नदी से 2.25किलोमीटर तक नहर भूमिगत है, इसके आगे 2.25 किलोमीटर तक खुली नहर है। जहां नहर भूमिगत है, वहां 11.5 मीटर गहराई पर पाईप बिछे हुए हैं। जिनसे पानी आगे बढ़ता है, कुछ अंतराल पर कुआं बनाए गए हैं। जिनमें मोटर पंप डालकर किसान खेतों में फसलों की सिंचाई करते हैं।
जिले की इकलौती योजनाः
कैथन डायवर्सन अशोकनगर ही नहीं आसपास के कई जिलों में इकलौती ऐसी योजना है, जिसमें नदी को मोड़कर नहर बनाई गई है। इसके बनने से खोपरा, सोपरा, बर्री और हाजूखेड़ी इन चार गांवों की कुल 600 हेक्टेयर जमीन सिंचित हो गई थी। किसानों को इस नहर के शुरू होने से बड़ा फायदा हुआ था। क्योंकि इस नहर से लाभान्वित होने वाला सबसे आखिरी गांव बरी में जलसंकट रहता है।
पाइप फूटे और मिट्टी जमा हुई तो बंद हो गई नहरः
यह नहर पिछले तीन वर्षों से बंद है क्योंकि भूमिगत नहर में बिछाए गए पाइप मिट्टी भर जाने से बंद हो गए थे। बताया गया है कि मिट्टी के दबाव से पाइप फूट गए और ऊपर से मिट्टी जमा होने से नहर पूरी तरह से बंद हो गई। इसे खोलने के लिए कई बार प्रयास किए गए थे। किंतु यह प्रयास सफल नहीं हुए तो विभाग ने राज्य स्तर पर बड़ी कार्य योजना का प्रस्ताव भेजा। यह प्रस्ताव स्वीकृत होकर आया और करीब एक महीने पहले काम चालू हो गया है। अशोकनगर की प्रयाग कंपनी इसका काम कर रही है। जिसके इंजीनियर गगन यादव का कहना था कि जहां मिट्टी भरी है, उसे हटा रहे हैं। जहां पाइप फूटे हैं, उन्हें हटाकर नए पाइप डालेंगे। जहां पाइप धंस रहे हैं, वहां नीचे सीमेंट कंक्रीट का बेस बनाएंगे।
इनका कहना है
नहर को चालू करने का काम चाल चल रहा है। काम बड़ा है है इसलिए एक वर्ष लग जाएगा लेकिन इस बार नहर को चालू करने के लिए ठोस योजना बनाई है।
व्हीके शाक्य, एसडीओ,
जल संसाधन विभाग, मुंगावली

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