उद्योग जगत जीएसटी में सुधार से गद-गद, कटौती का लाभ लोगों को देगा

नयी दिल्ली, 04 सितंबर (वार्ता) उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था में सुधार को आर्थिक वृद्धि बढ़ाने वाला और महंगाई कम करने वाला कदम बताया है और कहा है कि उद्योग जगत कर में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने को प्रतिबद्ध है।

उनका कहना है कि जीएसटी दर कम होने से कृषि एवं विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन की साधन-सामग्री की लागत कम होगी, मांग, आय और रोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने यह भी कहा है कि जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (जीएसटीएटी) के संचालन से अप्रत्यक्ष कर प्रणाली का संस्थागत ढांचा मज़बूत होगा, विवादों का तेज़ी से समाधान संभव होगा और करदाताओं का विश्वास बढ़ेगा। कम मूल्य के निर्यात खेपों पर जीएसटी रिफंड की सीमा हटाने के प्रावधान को निर्यात क्षेत्र में नकद धन की उपलब्धता की दृष्टि से अच्छा बताते हुए उनका कहना है कि इससे छोटे निर्यातकों, विशेष रूप से ई-कॉमर्स, कूरियर और डाक निर्यात में लगे निर्यातकों के लिए नकदी की उपलब्ध सुधरेगी। उनका यह भी कहना है कि उल्टे शुल्क ढांचे (तैयार माल की तुलना में उत्पादन सामग्री पर कर की दर) में सुधार से आयात पर निर्भरता कम होगी और भारतीय वस्तुओं की वैश्विक लागत प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा।

उद्योग मंडल फिक्की ने 56वीं जीएसटी परिषद बैठक में दरों को 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत की जगह एक सरलीकृत दो-स्तरीय संरचना (18 और पांच प्रतिशत) लागू करने के निर्णय का श्रेय उद्योग जगत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व तथा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की सराहना की है। इसमें कुछ अहितकर वस्तुओं के लिए 40 प्रतिशत की एक विशेष दर शामिल है। तंबाकू, गुटखा, सिगरेट, सट्टेबाजी, कैसीनो, लग्जरी कारें और नौकायें जैसी वस्तुयें इस श्रेणी में आयेंगी। इन पर राजस्व क्षतिपूर्व उपकर बना रहेगा। उद्योग मंडल फिक्की ने कहा है कि यह विकास-उन्मुख सुधार है, जो भारत की कर प्रणाली में पारदर्शिता, भरोसा और स्थिरता लाएगा। इससे घरेलू परिवारों, श्रम-प्रधान उद्योगों, एमएसएमई और स्वास्थ्य सेवा, कृषि, बुनियादी ढांचा और ऑटोमोबाइल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सीधा लाभ होगा, उपभोक्ताओं की लागत कम होगी, व्यवसायों को राहत मिलेगी और उपभोग-संचालित विकास को बढ़ावा मिलेगा।

फिक्की के अध्यक्ष हर्षवर्धन अग्रवाल ने कहा, “सरकार द्वारा किया गया और जीएसटी परिषद द्वारा अनुमोदित जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने का कार्य एक ऐतिहासिक सुधार है और फिक्की इसके लिए जीएसटी परिषद की सराहना करता है।”

उन्होंने कहा कि जीएसटी दर संरचना के सरलीकरण से वर्गीकरण संबंधी विवाद कम होंगे, अनुपालन में सुधार होगा और उलटे शुल्क ढांचे के कारण उत्पन्न विसंगतियों का समाधान होगा। फिक्की के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, अनंत गोयनका ने कहा, “उद्योग जगत कम दरों का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है और फिक्की अपने सदस्यों के साथ मिलकर इस दिशा में काम करेगा।”

फिक्की की महानिदेशक ज्योति विज ने कहा, “सरकार द्वारा निर्धारित जीएसटी ढांचे का पुनर्गठन और सरलीकरण भारत की सुधार यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। कर स्लैब की संख्या में कमी और ढेर सारी वस्तुओं और सेवाओं को पांच प्रतिशत की ‘मेरिट रेट’ पर लाने से अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और आने वाले दिनों में उपभोग मांग में वृद्धि की उम्मीद है।”

पीएचडी उद्योग मंडल के अध्यक्ष हेमंत जैन ने कहा कि इन सुधारों ने पहले ही बाजार में सकारात्मक गति पकड़ ली है। ऑटो, उपभोक्ता वस्तुओं और बीमा शेयरों में तेजी आयी, जो नयी कर व्यवस्था में निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है।

निर्यातकों के शीर्ष संगठन फियो के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने कहा, “परिषद द्वारा जोखिम विश्लेषण के आधार पर सात दिनों के भीतर निर्यात रिफंड जारी करने और कपड़ा, फार्मा, रसायन और उर्वरक जैसे क्षेत्रों के लिए उल्टे शुल्क ढांचे के तहत अनंतिम रिफंड जारी करने की मंजूरी एक बहुत ही स्वागत योग्य कदम है। ये सुधार कार्यशील पूंजी की रुकावटों को कम करने और हमारे निर्यातकों को समय पर राहत प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।”

उन्होंने कहा कि 1000 रुपये से कम के जीएसटी रिफंड की अनुमति देने से छोटे और ई-कॉमर्स निर्यातकों को अत्यधिक लाभ होगा।

भवन निर्माण क्षेत्र के उद्यमी और एमएनबी बिल्डफैब के प्रबंध निदेशक नकुल बजाज ने कहा कि सीमेंट पर जीएसटी को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करना एक ऐतिहासिक कदम है, जिसका रियल एस्टेट मूल्य श्रृंखला पर व्यापक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सीमेंट निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण सामग्री में से एक है, और इस युक्तिकरण से कुल परियोजना लागत में पांच-सात प्रतिशत की कमी आने की उम्मीद है, जो कि किफायती और मध्यम आय वर्ग की आवासीय परियोजनाओं के लिए विशेष रूप से महत्व रखता है।

उल्लेखनीय है कि जीएसटी परिषद ने परिवारों, किसानों और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र पर बोझ कम करने के उद्देश्य से व्यापक कर कटौती और छूट को भी मंजूरी दी है। आवश्यक वस्तुओं, कृषि मशीनरी और जीवन रक्षक दवाओं को महत्वपूर्ण कर राहत मिली है, जबकि व्यक्तियों के लिए बीमा प्रीमियम को पूरी तरह से जीएसटी से मुक्त कर दिया गया है।

अनुपालन के मोर्चे पर, कई व्यापार सुविधा उपायों की सिफारिश की गयी। इनमें स्वचालित रिटर्न दाखिल करना, कपड़ा, दवा और उर्वरक जैसे क्षेत्रों के लिए सात दिनों के भीतर त्वरित रिफंड और करदाताओं पर अनुपालन के बोझ को कम करने के लिए अन्य कदम शामिल हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि शैंपू, टूथपेस्ट, हेयर ऑयल, साइकिल, रसोई के बर्तन और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों जैसी आवश्यक वस्तुओं और रोजमर्रा के उत्पादों पर पर जीएसटी दरों में कमी से घरेलू बजट आसान होगा और खपत बढ़ेगी। कृषि मशीनरी, उर्वरकों और इनपुट पर कम दरें किसानों की लागत कम करेंगी, ग्रामीण आय में वृद्धि करेंगी और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देंगी।

इसी प्रकार, पूंजीगत वस्तुओं और औद्योगिक उत्पादन के लिए साधन-सामग्री पर दरों में कटौती से विनिर्माण लागत कम होगी, प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा और नये निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।

दरों में कमी से हस्तशिल्प, कपड़ा, चमड़ा, जूते, संगमरमर, ग्रेनाइट और खिलौनों जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को राहत मिलने से सूक्ष्म , लघु और मझोले उद्यमों को मजबूती मिलेगी, पारंपरिक आजीविका की रक्षा होगी और नये रोजगार सृजित होंगे। छोटी कारों, मोटरसाइकिलों, बसों, ट्रकों और ऑटो पार्ट्स पर कम दरों से ऑटोमोटिव क्षेत्र को लाभ होगा, जिससे सामर्थ्य और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

सीमेंट, नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों और निर्माण सामग्री पर कम जीएसटी से आवास और बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा मिलेगा, जो सरकार के सभी के लिए आवास और सतत विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप होगा।

उद्योग जगत का मानना है कि जीवनरक्षक दवाओं पर जीएसटी को घटाकर पांच प्रतिशत करने से इलाज की लागत में उल्लेखनीय कमी आयेगी, मरीजों तक दवाओं की पहुंच बढ़ेगी और किफायती दवाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति मज़बूत होगी।

उद्योग जगत का मनाना है कि ये सभी उपाय मिलकर मांग को बढ़ावा देंगे, सामर्थ्य में सुधार लायेंगे और उन क्षेत्रों को मज़बूती प्रदान करेंगे जो रोज़गार और अर्थव्यवस्था में वृद्धि के प्रमुख चालक हैं। इन सुधारों का निर्यात, आयात और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। वस्त्र, उर्वरक और नवीकरणीय ऊर्जा में उल्टे शुल्क ढांचे में सुधार से आयात पर निर्भरता कम होगी और भारतीय वस्तुओं की वैश्विक लागत प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा। वस्त्र, हस्तशिल्प, चमड़ा और इंजीनियरिंग वस्तुओं जैसे एमएसएमई-संचालित और श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर कम जीएसटी से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और साथ ही स्थानीय मूल्यवर्धन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

 

 

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