राहुल गांधी ने सीबीएसई उत्तर पुस्तिकाओं को फोन से स्कैन करने का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार को घेरा

नयी दिल्ली, 31 मई (वार्ता) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि 18.5 लाख बच्चों की उत्तर पुस्तिकाओं को नियमों को ताक पर रखकर मोबाइल फोन से स्कैन किया गया, जिसके कारण बच्चों के अंकों का गलत मूल्यांकन हुआ।

श्री गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में निविदा शर्तों में किए गए बदलावों को सिलसिलेवार तरीके से साझा करते हुए इसे एक बड़ा ‘फर्जीवाड़ा’ करार दिया है। कांग्रेस नेता के अनुसार, इस पूरे मामले की शुरुआत निविदा प्रक्रिया से हुई। सीबीएसई ने मई 2025 में जारी किए गए टेंडर में स्पष्ट रूप से यह शर्त रखी गई थी कि उत्तर पुस्तिकाओं को ऑटोमैटिक रोबोटिक स्कैनर्स के जरिए स्कैन किया जाए, उनकी बाइंडिंग (स्पाइन) सुरक्षित रहे और स्कैनिंग कम से कम 300 डीपीआई की गुणवत्ता पर हो। इसके बाद अगस्त में इसी टेंडर को दोबारा जारी किया गया, जिसमें से इन सभी कड़े नियमों को गुपचुप तरीके से हटा दिया गया। इसमें ‘रोबोटिक स्कैनर्स’ की जगह सामान्य ‘स्कैनर्स’ शब्द का इस्तेमाल किया गया और स्कैनिंग रेजोल्यूशन को भी 300 डीपीआई से घटाकर 200 डीपीआई कर दिया गया।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि नियमों में यह ढील एक खास वेंडर को फायदा पहुंचाने के लिए दी गई थी। उन्होंने कहा, “अब हमें पता चला है कि व्यावहारिक रूप से इसका क्या मतलब था। यह बात सामने आ चुकी है कि ‘कोएम्प्ट’ नाम की कंपनी ने उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करने के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया।”

श्री गांधी ने कहा कि बच्चों को जो धुंधली कॉपियां मिली हैं, जो पन्ने गायब हैं या जो कॉपियां स्कैन होने से रह गई हैं, वे कोई ‘गलतियां’ नहीं हैं। यह एक ऐसे अनुबंध का अनुमानित परिणाम है जिसे किसी खास वेंडर के हिसाब से तैयार किया गया था। उन्होंने इसे सीधे तौर पर एक धोखाधड़ी बताया है और कहा कि हर वह बच्चा जिसके अंकों का गलत मूल्यांकन हुआ, वह इस धोखाधड़ी का शिकार है।

कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर व्यंग्य कसते हुए कहा, “आज सुबह प्रधानमंत्री के पास आमों पर बात करने का समय था, लेकिन उनके पास उन 18.5 लाख बच्चों के बारे में बात करने का समय नहीं है जिनकी उत्तर पुस्तिकाएं फोन से स्कैन की गईं।”

श्री गांधी ने सवाल उठाते हुए कहा कि इस बड़े खुलासे के बाद भी धर्मेंद्र प्रधान जी अभी भी अपने पद पर बने हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, “मोदी जी की यह चुप्पी अब केवल उदासीनता नहीं है, बल्कि यह इस मामले में उनकी मिलीभगत को दर्शाती है।”

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